इंदौर का भागीरथ संकल्प : अब भू-जल के भरोसे नहीं रहेगा शहर, नए बोरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध

इंदौर

:: भागीरथपुरा त्रासदी के बाद सरकार का बड़ा नीतिगत बदलाव; 60 हजार नागरिकों के लिए मेडिकल कवच तैयार ::
:: नगर निगम में होगा भर्ती अभियान, 105 जल टंकियों की 24×7 ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए बनेगा स्पेशल सेल ::

इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने अब जल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया वैश्विक मानक स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। भागीरथपुरा जल त्रासदी को शासन-प्रशासन ने एक गंभीर सबक के रूप में लेते हुए शहर की जल प्रदाय प्रणाली में व्यापक सुधारात्मक परिवर्तन किए हैं। शनिवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इंदौर के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इनमें सबसे प्रमुख है – पूरे शहर में नए बोरिंग खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक। सरकार अब इंदौर को पूरी तरह सतही जल (नर्मदा) पर निर्भर बनाने और दूषित भू-जल से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को पूर्णतः समाप्त करने की दिशा में अग्रसर है।
रेसीडेंसी कोठी में आयोजित इस रणनीतिक बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, अपर मुख्य सचिव नीरज मण्डलोई, प्रभारी अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित शहर के सभी विधायक व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
:: भागीरथपुरा के लिए हेल्थ ब्लूप्रिंट : हर घर की होगी मेडिकल स्क्रीनिंग ::
मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल तात्कालिक संकट का समाधान करना नहीं, बल्कि नागरिकों का दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षित करना है।
60,000 नागरिकों का डेटाबेस : भागीरथपुरा के प्रत्येक रहवासी का सघन स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
यूनिक हेल्थ कार्ड : क्षेत्र के हर व्यक्ति को एक विशेष स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें उसकी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप से संचित होगी ताकि भविष्य में भी उसकी निगरानी की जा सके।
नि:शुल्क उपचार : पैथोलॉजी जांच से लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों के परामर्श और फॉलो-अप तक की पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा नि:शुल्क संचालित की जाएगी।
:: नर्मदा जल ही स्थायी विकल्प : 72 घंटे की समय-सीमा ::
बैठक में बुनियादी ढांचे को लेकर ठोस कार्ययोजना पर मुहर लगी। भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत हिस्से में नई पाइपलाइन का संजाल बिछा दिया गया है, जहाँ अगले 72 घंटों के भीतर नर्मदा का शुद्ध जल प्रदाय शुरू हो जाएगा। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि जब तक 100 प्रतिशत पाइपलाइन का कार्य पूर्ण नहीं होता, टैंकरों के माध्यम से शुद्ध जल की निर्बाध आपूर्ति जारी रखी जाए। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि वे निजी ट्यूबवेल के पानी का उपयोग केवल गैर-पेयजल कार्यों के लिए ही करें।
:: 105 टंकियों पर डिजिटल पहरा ::
भविष्य में दूषित जल की किसी भी आशंका को जड़ से मिटाने के लिए इंदौर की सभी 105 जल टंकियों को आधुनिक ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके लिए एक स्पेशल क्वालिटी कंट्रोल सेल का गठन होगा, जो सेंसर आधारित तकनीक के माध्यम से पानी की शुद्धता की रियल-टाइम रिपोर्ट लैब और कंट्रोल रूम को प्रेषित करेगा।
:: निगम में रिक्त पदों पर होगी सीधी भर्ती ::
शहर की बढ़ती आबादी और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए नगर निगम के ढांचे को सशक्त बनाया जा रहा है। लंबे समय से लंबित रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार ने विशेष भर्ती अभियान को हरी झंडी दे दी है। सीधी भर्ती और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी, जिससे अमृत योजना और जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को नई गति मिल सके।
:: विजन 2026 : इंदौर के लिए 4 बड़े संकल्प ::
बोरिंग मुक्त शहर : भू-जल के अनियंत्रित दोहन और प्रदूषण से मुक्ति के लिए नए खनन पर पूर्ण प्रतिबंध।
स्मार्ट वॉटर गवर्नेंस : जल टंकियों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब की स्थापना।
मेडिकल गारंटी : प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों हेतु डिजिटल हेल्थ कार्ड।
सशक्त कार्यपालिका : रिक्त पदों की पूर्ति कर निगम की सेवा गुणवत्ता में वृद्धि।