जनसुनवाई : इंदौर प्रशासन ने पेश की संवेदनशीलता, मौके पर ही सुलझे कई जटिल मामले

इंदौर

:: बुजुर्ग दंपत्ति को मिली दुकान, ग्रामीणों को मिली सड़क और दिव्यांग को मिला स्वरोजगार का संबल ::
इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई अब आम जनता के लिए उम्मीद की किरण साबित हो रही है। मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में नागरिकों की समस्याओं का न केवल श्रवण किया गया, बल्कि कई वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित निराकरण भी किया गया।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने जनसुनवाई की कमान संभालते हुए करीब 295 आवेदनों पर सुनवाई की। इस दौरान अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पंवार, रोशन राय, रिंकेश वैश्य और निशा डामोर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनसेवा में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
:: वर्षों पुराने विवाद सुलझे, ग्रामीणों में हर्ष ::
जनसुनवाई में समाधान के कई प्रेरक प्रसंग सामने आए। चंदनबाला और पारस जैन नामक बुजुर्ग दंपत्ति ने बताया कि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से उनकी दुकान किराएदार के अवैध कब्जे से मुक्त हो सकी। वहीं, देपालपुर के ग्राम पेमालपुर (सहवादा) के ग्रामीणों ने वर्षों पुरानी सड़क की मांग पूरी होने पर खुशी जताई। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में कुछ लोग बाधा उत्पन्न कर रहे थे, जिसे प्रशासनिक हस्तक्षेप से दूर कर निर्माण कार्य शुरू कराया गया। यह सड़क अब जनभागीदारी से साकार हो रही है।
शिक्षा विभाग के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शिवम वर्मा ने शासकीय पीएमश्री विद्यालय की पूर्व प्राचार्य भारती पवार की पेंशन तत्काल स्वीकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित भुगतानों में देरी के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की बात भी कही।
:: दिव्यांग के स्वावलंबन को मिला प्रशासनिक साथ ::
प्रशासनिक संवेदनशीलता तब और निखर कर आई जब दृष्टिबाधित दिव्यांग सुनील सेन जनसुनवाई में पहुंचे। जनसहयोग और जेयू जोशी के प्रयासों से सुनील को एक विक्रय वाहन उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे पूजन और सेनेटरी सामग्री बेचकर सम्मानजनक आजीविका कमा रहे हैं। अधिकारियों ने न केवल सुनील से कैलेंडर खरीदे, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी तत्काल शुरू की।
कुल प्राप्त 295 आवेदनों में से अधिकांश का निराकरण मौके पर ही कर दिया गया। शेष जटिल मामलों के लिए अधिकारियों को समय-सीमा आवंटित की गई है, जिसकी निगरानी स्वयं कलेक्टर द्वारा की जाएगी। प्रशासन के इस सक्रिय दृष्टिकोण ने शासन के प्रति जनता के विश्वास को और सुदृढ़ किया है।