इंदौर के स्वाभिमान को अमृत की धार: मुख्यमंत्री ने दी 800 करोड़ की बड़ी सौगात

इंदौर

विकास का पावर हाउस बना इंदौर, अब हर घर पहुंचेगा शुद्ध नर्मदा जल; सीएम बोले- आपदा पर सियासत बर्दाश्त नहीं ::
इंदौर । इंदौर केवल एक शहर नहीं, बल्कि निरंतर प्रगति, स्वच्छता और सुशासन की एक ऐसी विकासशील सोच है, जिस पर आज पूरे मध्यप्रदेश को गर्व है।
यह उद्गार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इंदौरवासियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने शहर की भविष्य की प्यास बुझाने और पेयजल ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली ऐतिहासिक जलप्रदाय परियोजना का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूर्य उत्तरायण होकर प्रकाश फैलाता है, वैसे ही यह परियोजना इंदौर के हर घर में खुशहाली का प्रकाश लाएगी।
:: जनसेवा सर्वोपरि : पीड़ा पर राजनीति करना अनुचित ::
भागीरथपुरा की जल-जनित घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की घड़ी में सरकार और प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने विपक्ष को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आपदा के समय राजनीति करना इंदौर की संस्कृति नहीं है। डॉ. यादव ने जल सुरक्षा की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए बताया कि केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाएं मालवा और निमाड़ के भाग्य को बदलने वाली साबित होंगी।
:: इंदौर नंबर वन था, है और रहेगा : विजयवर्गीय ::
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के संघर्ष और नर्मदा जल क्रांति के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंदौरवासियों के संकल्प की जीत है। उन्होंने शहर के सफाई मित्रों और जागरूक नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर नंबर वन था, है और रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों की सहभागिता ही इंदौर की असली आन-बान और शान है, जिसे कभी आंच नहीं आने दी जाएगी।
:: 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ जल-खाका ::
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि से 1100 करोड़ की मूल योजना को बढ़ाकर अब 2400 करोड़ रुपये तक विस्तार दिया जा रहा है। परियोजना के तहत जलूद में 1650 एम.एल.डी. क्षमता का नया इन्टेकवेल और आधुनिक जलशोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। अगले 10 वर्षों तक इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी भी तय की गई है, जिससे आने वाले दशकों तक इंदौर को जल संकट से मुक्ति मिलेगी।
इस समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, महेन्द्र हार्डिया, मधु वर्मा, मनोज पटेल एवं गोलू शुक्ला प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इनके साथ ही सुमित मिश्रा, श्रवण चावड़ा, पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे, प्रताप करोसिया सहित महापौर परिषद के सदस्य मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी सहभागिता की।