चलता-फिरता ताबूत बनीं बसें : नियम तोड़े तो मौके पर फिटनेस निरस्त; केबिन के अवैध पार्टीशन और दरवाजे हटाए ::
इंदौर । देश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर बसों में आगजनी की हालिया घटनाओं से सबक लेते हुए इंदौर परिवहन विभाग ने ऑपरेशन सुरक्षा शुरू कर दिया है। शनिवार को आरटीओ की विशेष टीमों ने शहर के प्रमुख बस स्टैंडों और यार्डों में सघन जांच अभियान चलाया। बस बॉडी कोड (एआईएस-119 एवं एआईएस-052) का खुला उल्लंघन पाए जाने पर विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए एक बस की फिटनेस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी और कई बसों में मौके पर ही अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए।
एआरटीओ अर्चना मिश्रा के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने तीन इमली रोड, राजीव गांधी चौराहा और चोइथराम रोड स्थित बस यार्डों में औचक दबिश दी। निरीक्षण के दौरान अधिकांश बसों में ड्राइवर और यात्री केबिन के बीच अवैध लकड़ी और कांच के पार्टीशन पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, आगजनी जैसी आपात स्थिति में ये रुकावटें यात्रियों के लिए मौत का जाल बन जाती हैं। टीम ने मौके पर ही इन्हें हटवाया और संचालकों को कड़ी चेतावनी जारी की।
:: 30 दिन का अल्टीमेटम : अब एफडीएसएस के बिना बसें अनफिट
एआरटीओ राजेश गुप्ता ने जिले के सभी 489 स्लीपर बस संचालकों की आपात बैठक ली। संचालकों से लिखित शपथ-पत्र लिया गया है कि वे आगामी 30 दिनों में अपनी बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) अनिवार्य रूप से स्थापित करेंगे। विभाग ने निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) सेंटरों को भी निर्देश दिए हैं कि मानकों की अनदेखी करने वाली बसों की फिटनेस रिपोर्ट किसी भी स्थिति में पास न की जाए।
:: इन 5 मानकों पर होगी स्लीपर बसों की अग्नि-परीक्षा ::
नो-पार्टीशन : ड्राइवर और पैसेंजर केबिन के बीच कोई भी दरवाजा या अवरोध प्रतिबंधित।
फायर कवच : 10 किलो का अग्निशमन यंत्र और सक्रिय एफडीएसएस प्रणाली अनिवार्य।
इमरजेंसी गेट : बस की लंबाई के अनुसार 4 से 5 चालू हालत में निकासी द्वार।
डिजिटल नजर : वीएलटीडी, पैनिक बटन और स्पीड गवर्नर का वर्किंग होना जरूरी।
जीरो टॉलरेंस : बर्थ के नीचे स्टोरेज, ज्वलनशील पदार्थ और नशे में ड्राइविंग पर सख्त रोक।
:: ऑफ-रोड हुई बसें ::
इंदौर में कुल 489 पंजीकृत स्लीपर बसों में से 70 से अधिक बसें मानकों की कमी के कारण पहले ही ऑफ-रोड की जा चुकी हैं। विभाग ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बस माफियाओं के खिलाफ अब सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।

