:: मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष शांति की राह पर लौटे 10 हार्डकोर नक्सली; बोले- सतत निगरानी और कार्रवाई से घटा नक्सली दायरा ::
बालाघाट/इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आज बालाघाट में 10 हार्डकोर, सशस्त्र और वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर विश्वास जताते हुए AK-47, इंसास राइफल, SLR जैसे आधुनिक हथियारों और वॉकी-टॉकी सेटों के साथ ऐतिहासिक आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी नक्सलियों पर विभिन्न राज्यों में कुल ₹2 करोड़ 36 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित था, जिनमें 4 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि जो कानून की राह अपनाते हैं, उनके पुनर्वास की चिंता सरकार करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सतत निगरानी, सघन जांच और कार्रवाइयों से प्रदेश में नक्सली दायरा तेज़ी से घटा है और लक्ष्य है कि जनवरी 2026 तक लाल सलाम को आखिरी सलाम कहा जाए। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने बताया कि इस सफलता ने हॉक फोर्स, जिला पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा के सुव्यवस्थित संयुक्त अभियानों की प्रभावशीलता को साबित किया है।
:: इनामी नक्सली ::
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली भोरमदेव एरिया कमेटी से सम्बद्ध हैं, जिनमें एमएमसी सचिव सुरेन्द्र उर्फ कबीर उर्फ सोमा सोढी (₹62 लाख इनामी), स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर राकेश ओडी उर्फ मनीष (₹62 लाख इनामी) और एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम) समर उर्फ समारू उर्फ राजू अतरम (₹14 लाख इनामी) जैसे शीर्ष नक्सली शामिल हैं। इनके अलावा सलीता उर्फ सावित्री अलावा, विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी, लालसिंह मरावी उर्फ सींगा, शिल्पा नुप्पो, जरिना उर्फ जोगी मुसाक, जयशीला उर्फ ललिता ओयम और नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा ने भी समर्पण किया है।
:: पुनर्वास के प्रयास ::
शासन ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 46 एकल सुविधा केंद्र स्थापित किए हैं, जिनके माध्यम से वनाधिकार पट्टा और रोजगार जैसी योजनाएं प्रदान की जा रही हैं, ताकि आत्मसमर्पण करने वाले मुख्यधारा में लौट सकें। डीजीपी ने आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश पुलिस निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश को नक्सलवाद-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

