कृतज्ञता और धैर्य  ज़िंदगी के  नियम हैं

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‘सिया के राम’ फेम दानिश अख्तर, जो जय मां वैष्णोदेवी, संतोषी मां, काकभुशुंडि रामायण और शनिदेव जैसे कई शोज़ का हिस्सा रह चुके हैं, मानते हैं कि ज़िंदगी बहुत अनिश्चित है। लेकिन वे न अतीत में जीते हैं और न ही भविष्य की चिंता करते हैं। उनका ध्यान हमेशा वर्तमान पर रहता है। उनका मानना है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, इंसान को अपने लक्ष्य पर काम करते रहना चाहिए।, “ज़िंदगी बहुत अनप्रिडिक्टेबल है। हम कहते तो हैं कि वर्तमान में जीना चाहिए, लेकिन अक्सर हम अपने लक्ष्य और मन की शांति को बाद में टालते रहते हैं। , “कदम चाहे चार बढ़ें या एक, चलते रहना ज़रूरी है। अपने लक्ष्य पर ध्यान रखिए, बाकी दुनिया क्या कहती है, उसे नजरअंदाज कीजिए। कभी-कभी जीवन में रुकना भी पड़ता है, यह बिल्कुल ठीक है। आराम करना ज़रूरी है, लेकिन हार मानना विकल्प नहीं है।”