गाजियाबाद । मुरादनगर पुलिस ने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक कंपनी के नाम का दुरुपयोग कर लीवर की प्रसिद्ध दवा लिव-52 की नकली टैबलेट बनाकर बाजार में बेच रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के सरगना मयंक अग्रवाल सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से लगभग 50 हजार नकली टैबलेट, डेढ़ हजार खाली सफेद डिब्बियां, भारी मात्रा में रैपर और अन्य पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई है। इस सफलता पर पुलिस टीम को 20 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोदीनगर निवासी सरगना मयंक अग्रवाल, दिल्ली निवासी अनूप गर्ग, नंदग्राम के तुषार ठाकुर व आकाश ठाकुर और निवाड़ी के नितिन त्यागी के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नितिन त्यागी 2023 में नगर पंचायत अध्यक्ष पद का निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुका है, जबकि तुषार ठाकुर गाजियाबाद के एक मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल द्वितीय वर्ष का छात्र है। तुषार को दवाओं की तकनीकी जानकारी थी, जिसका उपयोग वह सप्लाई और कूरियर नेटवर्क संभालने में करता था।इस अवैध धंधे का खुलासा तब हुआ जब संबंधित नामी कंपनी के प्रतिनिधियों को अलीगढ़ के बाजार में नकली दवाएं बेचे जाने की गुप्त सूचना मिली। जांच करने पर पता चला कि इन दवाओं की खेप मुरादनगर से कूरियर के जरिए भेजी गई थी। पुलिस ने कूरियर कंपनी से मिले सुरागों के आधार पर एनपी ट्रेडिंग नामक एक फर्म का पता लगाया, जिसे फर्जी तरीके से पंजीकृत कराया गया था। 3 जनवरी 2026 को इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने साक्ष्य जुटाते हुए आरोपियों को दबोच लिया।
अभी भी गिरोह के छह अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पूछताछ के दौरान गिरोह के काम करने के संगठित तरीके का खुलासा हुआ। आरोपियों ने महज चार महीने पहले ही यह काम शुरू किया था। वे मेरठ से सफेद डिब्बियां और ढक्कन बनवाते थे, जबकि खैरनगर में प्रिंटिंग प्रेस के जरिए हूबहू दिखने वाले रैपर तैयार कराए जाते थे। नकली टैबलेट्स का निर्माण सोनीपत स्थित एक प्रयोगशाला में कराया जा रहा था। इन सभी सामानों को एकत्र करने के बाद मुरादनगर में इनकी पैकिंग की जाती थी। गिरोह ने जीएसटी की फर्जी बिलिंग के लिए भी अलग से इंतजाम कर रखे थे ताकि किसी को शक न हो। यह गिरोह अब तक उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ और शामली में 50 हजार से अधिक नकली गोलियां खपा चुका है। वे मेडिकल स्टोर संचालकों को असली दवा के बाजार भाव से 20 प्रतिशत कम कीमत पर यह माल उपलब्ध कराते थे। पुलिस अब उन मेडिकल स्टोर संचालकों की भी भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने कम मुनाफे के चक्कर में इन नकली दवाओं को खरीदा। डीसीपी देहात ने बताया कि बरामद दवाओं के सैंपल लैब में जांच के लिए भेज दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन नकली दवाओं में किन हानिकारक तत्वों का उपयोग किया गया था। यह मामला न केवल कॉपीराइट का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ किया गया एक गंभीर अपराध भी है।

