चंदे की रकम का आप हिसाब दीजिए।
पाँच साल तक कहाँ थे जवाब दीजिए।।
पलायन से हुआ गाँव मेरा बरबाद,
बरबादी पे लिख कर किताब दीजिए।
आपके वादे के भरोसे हम जीते रहे,
सब्र ख़ातिर हमको धन्यवाद दीजिए।
वोट लेकर जो गए कहाँ खो गए आप,
आए हैं तो चेहरे पर नक़ाब दीजिए।
तबाह हुई खेती हमारी कई सालों की,
खेती उद्योग बने ऐसा सुझाव दीजिए।
छाई है मायूसी अवाम के चेहरे पर,
नए साल पर भेंट में गुलाब दीजिए।
आए हैं ये फिर से सेवा करने ‘वीरेन’
अब सेवादार का इन्हें ख़िताब दीजिए।
वीरेन्द्र नारायण झा ‘वीरेन’
समया-मधुबनी-बिहार-मिथिला।

