ईरान के एक जहाज को श्रीलंका ने अपनी शरण में लिया, उधर ड्रोन कैरियर अमेरिका ने कर दिया तबाह

अंतरराष्ट्रीय

कोलंबो । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब समुद्र में एक भीषण मोड़ ले चुका है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने ईरान के एक विशाल ड्रोन कैरियर जहाज पर हमला कर उसे पूरी तरह तबाह कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई है। यह हमला ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी नौसेना को निष्प्रभावी करना है।
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी सेना ने श्रीलंका के समीप ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को डुबो दिया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल कर किसी युद्धपोत को जलमग्न किया है। कूपर के मुताबिक, अमेरिकी सेना अब तक ईरान के 30 से अधिक युद्धपोतों और नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर चुकी है। हालिया निशाना बना ड्रोन कैरियर आकार में दूसरे विश्व युद्ध के एयरक्राफ्ट कैरियर जितना बड़ा बताया जा रहा है।
इस बीच, हिंद महासागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए श्रीलंका सरकार भी एक्शन में आ गई है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पुष्टि की है कि उनकी सरकार ने ईरान के एक अन्य जहाज आईआरआईएस बुशहर और उसके चालक दल को अपनी शरण में लेने का फैसला किया है। यह कदम विभिन्न राजनयिक मिशनों और जहाज के कप्तान के साथ हुई लंबी चर्चा के बाद उठाया गया है। बताया गया है कि इस जहाज ने 4 मार्च को श्रीलंकाई बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। जहाज पर सवार 208 लोगों को, जिनमें नौसैनिक अधिकारी और कैडेट शामिल हैं, सुरक्षित किनारे लाने की प्रक्रिया जारी है। इन लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए त्रिंकोमाली अस्पताल भेजा जा रहा है और जहाज को भी सुरक्षित रूप से त्रिंकोमाली बंदरगाह की ओर ले जाया जा रहा है।