पश्चिम एशिया संकट की मार : इंदौर का विश्वप्रसिद्ध नमकीन हुआ महंगा; सेव-गठिया के बढ़े दाम

इंदौर

:: ईंधन और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में उछाल से लागत बढ़ी, 20 रुपये प्रति किलो तक की हुई बढ़ोतरी ::
इंदौर । वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की लपटों ने अब इंदौर के जायके को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाय चेन) बाधित होने से इंदौर का विश्वप्रसिद्ध नमकीन उद्योग संकट में है। ईंधन और पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ने के कारण शहर में नमकीन के खुदरा दामों में 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई है।
इंदौर नमकीन-मिष्ठान्न क्रेता एवं विक्रेता कल्याण संघ के सचिव अनुराग बोथरा ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया के संकट ने कमर्शियल कुकिंग गैस और प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग सामग्री को काफी महंगा कर दिया है। नमकीन की पैकिंग में उपयोग होने वाली प्लास्टिक थैलियों की कीमत, जो पहले 190 रुपये प्रति किलो थी, अब बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसी तरह, रीयूजेबल प्लास्टिक कंटेनरों की कीमतों में भी 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
:: ईंधन और खाद्य तेल की दोहरी मार ::
नमकीन निर्माण में मुख्य भूमिका निभाने वाले खाद्य तेल और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ने से छोटे निर्माताओं के लिए व्यापार करना कठिन हो गया है। विशेषकर उन 1,500 इकाइयों पर सीधा प्रभाव पड़ा है जो पूरी तरह गैस संचालित भट्ठियों का उपयोग करती हैं। इंदौर का नमकीन न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी निर्यात किया जाता है, जिससे सालाना करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो आने वाले महीनों में कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, नमकीन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी ने आम आदमी की थाली से उसका पसंदीदा स्वाद थोड़ा महंगा कर दिया है।