स्पाइसजेट में 20 फीसद स्टाफ की छंटनी, आर्थिक संकट गहराया

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-सीनियर अफसरों को महीनों से वेतन नहीं, बेड़े में महज 13 अपने विमान बचे, मार्केट शेयर भी घटा
नई दिल्ली । देश की निजी एयरलाइन स्पाइसजेट गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। परिचालन क्षमता में गिरावट के बीच कंपनी ने करीब 20 फीसद स्टाफ को कम करने का फैसला लिया है। इसके तहत 500 से अधिक कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एयरलाइन स्पाइसजेट के पास वर्तमान में लगभग 6,800 कर्मचारी हैं, लेकिन इसके अपने विमान घटकर केवल 13 रह गए हैं, जिनमें 10 बोइंग और 3 क्यू400 शामिल हैं। इसके अलावा 14 विमान वेट-लीज पर संचालित किए जा रहे हैं। कंपनी के अंदर वित्तीय दबाव साफ नजर आ रहा है। सीनियर अधिकारियों को जनवरी से वेतन नहीं मिला है, जबकि अन्य कर्मचारियों की सैलरी भी 2-3 महीने की देरी से दी जा रही है। इसके साथ ही कंपनी पर जीएसटी, टीडीएस और पीएफ से जुड़े 100 करोड़ रुपए से अधिक के बकाया हैं।
घरेलू एविएशन बाजार में भी स्पाइसजेट की स्थिति कमजोर हुई है। कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी घटकर 3.9 प्रतिशत रह गई है, जबकि नई एयरलाइन अकासा एयर 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आगे निकल गई है।
कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष व नाराजगी
कंपनी ने इस्तीफा दे चुके कई इंजीनियरों का नोटिस पीरियड भी समाप्त कर उन्हें तुरंत कार्यमुक्त करने का निर्णय लिया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है। वहीं, पुराने कर्मचारियों को फुल एंड फाइनल भुगतान न मिलने से नाराजगी बनी हुई है।
पायलटों के लिए नए नियम लागू
पायलटों के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत उन्हें 21 दिन काम और 9 दिन छुट्टी दी जाएगी। इससे कैप्टन्स का मासिक वेतन 7.5 लाख रुपए से घटकर करीब 6 लाख रुपए रह जाएगा। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का घाटा 35 प्रतिशत बढ़कर 621 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 458 करोड़ रुपए था। वहीं, ऑपरेशनल रेवेन्यू भी घटकर 792 करोड़ रुपए रह गया। इस स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते घाटे, घटते बेड़े और कर्मचारियों की असंतुष्टि के चलते कंपनी के सामने आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।