मुंबई । बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बड़ा झटका देते हुए उसकी समय से पहले रिहाई और सजा में छूट की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया और सलेम को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।
यह याचिका जुलाई 2025 में पहली बार सुनवाई के लिए आई थी। उस समय अदालत ने प्रारंभिक तौर पर इसे कमजोर मानते हुए भी सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। हालांकि अंतिम निर्णय में अदालत ने स्पष्ट किया कि सलेम के खिलाफ दर्ज गंभीर अपराधों को देखते हुए उसे किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत में दलील दी कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सलेम का आपराधिक इतिहास बेहद गंभीर है, जिसमें आतंकवाद, हत्या और जबरन वसूली जैसे मामले शामिल हैं।
राज्य सरकार ने भी सलेम की याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकार ने कहा कि इस तरह के अपराधों में दोषी व्यक्ति को सजा में छूट देना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। जेल विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक सुहास वार्के ने अपने हलफनामे में बताया कि 1993 के बम धमाकों के बाद सलेम देश छोड़कर फरार हो गया था।
गौरतलब है कि 1993 मुंबई बम्ब ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह वर्तमान में तलोजा जेल में बंद है। सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जेल में अच्छे व्यवहार और सजा में मिलने वाली छूट को जोड़कर उसकी सजा पूरी मानी जानी चाहिए और उसे समय से पहले रिहा किया जाए। उसने 28 फरवरी 2025 से अपनी रिहाई का दावा किया था। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि सलेम का आपराधिक रिकॉर्ड इतना गंभीर है कि उसे किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।

