जल संसाधन मंत्री सिलावट से मिले राजस्थान के मंत्री दिलावर; 12 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का प्रस्ताव ::
इंदौर । मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच जल संसाधनों के बेहतर समन्वय और साझा सहयोग की एक नई इबारत इंदौर में लिखी गई। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से बुधवार को राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने उनके निज निवास पर सौजन्य भेंट की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र राजस्थान के डार्क ज़ोन बन चुके रामगंजमंडी क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना रहा। मंत्री सिलावट ने इंदौर आगमन पर राजस्थान के मंत्री का भव्य स्वागत किया और अंतरराज्यीय हितों पर विस्तृत चर्चा की।
मुलाकात के दौरान मंत्री दिलावर ने कोटा लोकसभा क्षेत्र के रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र की विकट स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र वर्तमान में डार्क ज़ोन घोषित है, जहाँ भूजल स्तर चिंताजनक गहराई तक गिर चुका है। सतही और भूमिगत जल स्रोतों के अभाव में क्षेत्र की लगभग 12 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि असिंचित है, जिससे स्थानीय किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मंत्री दिलावर ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि गांधी सागर बांध से उपलब्ध जल को रेवा बैराज के माध्यम से रामगंजमंडी तक पहुँचाया जा सकता है। इस पहल से न केवल सूखी पड़ी 12 हजार हेक्टेयर भूमि को जीवनदान मिलेगा, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य भी बदल जाएगा।
मंत्री सिलावट ने राजस्थान के इस प्रस्ताव पर बेहद सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों के हित और दोनों राज्यों के मधुर संबंधों को देखते हुए वे इस विषय पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शीघ्र चर्चा करेंगे। सिलावट ने कहा कि अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से किसानों की खुशहाली के लिए मध्यप्रदेश सरकार हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है। इस अवसर पर दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित योजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर प्रारंभिक विचार-विमर्श किया। बैठक में जल बंटवारे के नियमों और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर भी चर्चा हुई, ताकि इस योजना को धरातल पर उतारा जा सके।

