मृतकों का बढ़ सकता है आंकड़ा, कई मलबे में दबे होने की आशंका
हमीरपुर । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में देर रात आए तेज आंधी-तूफान के कारण बेतवा नदी पर बन रहे एक बड़े निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। ललपुरा क्षेत्र के मोराकांडर और परसनी (कुरारा इलाका) को आपस में जोड़ने के लिए बनाए जा रहे इस 900 मीटर लंबे पुल के ढहने से एक बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक 6 मजदूरों की मलबे में दबकर मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार, रात करीब 2 से 3 बजे के बीच अचानक क्षेत्र में मौसम खराब हो गया और तेज आंधी-तूफान शुरू हो गया। इसी दौरान निर्माणाधीन पुल की एक अत्यंत भारी-भरकम कंक्रीट स्लैब अचानक ढह गई। स्लैब के नीचे वहां काम कर रहे और विश्राम कर रहे मजदूर दब गए। हादसे की भयावहता को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि मलबे से और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार वर्मा के नेतृत्व में रात में ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। मलबे को हटाने और उसमें फंसे जीवित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिकता मलबे में दबे सभी लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने की है।
मुख्यमंत्री योगी ने दिए राहत के निर्देश
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए मामले का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने दुर्घटना में जान गंवाने वाले दिवंगत मजदूरों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से मौके पर उपस्थित रहकर राहत और बचाव कार्य की निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने और नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस हादसे के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेताओं ने घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। विपक्ष द्वारा सरकार पर लापरवाही और कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए मांग की गई है कि इस निर्माण कार्य की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराई जाए। इसके साथ ही पीड़ित गरीब परिवारों के लिए 2-2 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता राशि मुहैया कराने की मांग उठाई गई है।

