-प्रदेश प्रभारियों और अध्यक्षों को बदलने की योजना, सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान की
नई दिल्ली । कांग्रेस आलाकमान देश भर में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा और व्यापक बदलाव करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी आधे दर्जन से ज्यादा राज्यों में अपने प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की योजना पर काम कर रही है। इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान को लेकर है, जहां एक बार फिर दिग्गज युवा नेता सचिन पायलट की भूमिका को लेकर सियासी बाजार गर्म हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस पुनर्गठन प्रक्रिया ने पिछले हफ्ते तब गति पकड़ी, जब राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। पार्टी सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर खड़गे के कार्यकाल का यह आखिरी सबसे बड़ा सांगठनिक फेरबदल हो सकता है। पार्टी का मुख्य ध्यान उन राज्यों पर है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होना हैं। इसलिए संगठनात्मक तैयारी एक अहम प्राथमिकता है।
कांग्रेस गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होने वाले चुनावी मुकाबलों पर भी नजर रख रही है, जहां अगले साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है। पंजाब को छोड़कर, इन सभी राज्यों में पार्टी का सीधा मुकाबला बीजेपी से होने की संभावना है। राजस्थान में भी नेतृत्व में बदलाव की संभावना है, जहां मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि राजस्थान कांग्रेस के अगले अध्यक्ष बनने की दौड़ में सचिन पायलट सबसे आगे हैं।
दिल्ली में भी मौजूदा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ नेता अभिषेक दत्त इस पद के लिए सबसे आगे चल रहे हैं। दिल्ली और राजस्थान के अलावा पार्टी की व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़, केरल, तमिलनाडु और पंजाब में भी संगठनात्मक बदलाव की उम्मीद है। कांग्रेस हरियाणा, असम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लिए भी नए राज्य प्रभारी नियुक्त कर सकती है। ये पद अलग-अलग कारणों से खाली हुए हैं और जल्द ही नियुक्तियों की घोषणा हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक केरल में भी नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद है और पार्टी आने वाले हफ़्तों में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। इस संभावित फेरबदल को कांग्रेस नेतृत्व की उस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद अगले साल यूपी, पंजाब, मणिपुर, गोवा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करना है। राजस्थान में 2028 में चुनाव होंगे।

