भोपाल । राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारतीयता आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनेगी तथा संस्कार, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण से आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।
राज्यपाल पटेल उज्जैन स्थित महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 21 विद्यार्थियों को पीएचडी सहित कुल 1,303 उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही 16 स्वर्ण, 13 रजत और 13 कांस्य पदक देकर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की प्रकाशित पुस्तकों का भी विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि भारत कभी विश्व का प्रमुख शिक्षा केंद्र था और अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश पुनः उसी गौरव की ओर अग्रसर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करने का आह्वान किया। विद्यार्थियों से उन्होंने माता-पिता के सम्मान, भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था और श्रेष्ठ चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बनाने की अपील की।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा से जोड़ने में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत ऊर्जा और ज्ञान के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा।
समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम्, पुणे के स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज तथा लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, विश्वविद्यालय के अधिकारी, संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

