नई दिल्ली । भारत सरकार ने रक्षा उत्पादन को नई गति देने के लिए एक अहम नीतिगत फैसला लिया है। रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्याधुनिक अस्त्र मार्क-2 एयर-टू-एयर मिसाइल के उत्पादन में पहली बार निजी क्षेत्र को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया जाएगा, जिसमें टाटा समूह, महिंद्रा, अडानी डिफेंस, भारत फोर्ज और आईकॉम जैसी कंपनियां भाग ले सकेंगी। यह कदम भारत को रक्षा उत्पादन और हथियार निर्यात के क्षेत्र में नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
सरकार इस परियोजना में वही मॉडल अपना रही है, जिसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान एएमसीए परियोजना में अपनाया गया है। इस मॉडल के तहत मिसाइल का डिजाइन और तकनीक सरकारी एजेंसियों के पास रहेगी, जबकि बड़े पैमाने पर निर्माण का जिम्मा निजी कंपनियां संभालेंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, सेना की जरूरतें समय पर पूरी होंगी और निर्यात ऑर्डर भी तेजी से पूरे किए जा सकेंगे। वर्तमान में अस्त्र मिसाइल का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करती है, लेकिन सशस्त्र बलों की बढ़ती मांग और विदेशों से संभावित ऑर्डर को देखते हुए अकेले बीडीएल के लिए उत्पादन पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। निजी कंपनियों के जुड़ने से नई उत्पादन इकाइयों का विकास होगा, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनेगी और मिसाइलों की डिलीवरी में तेजी आएगी।
सरकार के इस फैसले के पीछे विदेशी बाजारों से बढ़ती मांग भी एक महत्वपूर्ण कारण है। हाल ही में इंडोनेशिया ने भारत की ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों में रुचि दिखाई है। लगभग 180 से 200 किलोमीटर मारक क्षमता वाली अस्त्र मार्क-2 एक अत्याधुनिक बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमान को आंखों से दिखाई देने की सीमा से पहले ही निशाना बनाने में सक्षम है। इसे भारतीय वायुसेना के तेजस मार्क-1ए, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई और नौसेना के राफेल मरीन लड़ाकू विमानों पर तैनात किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अस्त्र मार्क-2 को चीन की लंबी दूरी की पीएल-15ई एयर-टू-एयर मिसाइल का प्रभावी जवाब माना जा रहा है। इसकी उन्नत सीकर तकनीक और लंबी मारक क्षमता भारतीय वायुसेना को सामरिक बढ़त प्रदान करेगी। सरकार की योजना केवल अस्त्र मार्क-2 तक सीमित नहीं है। भविष्य में 500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल के उत्पादन में भी निजी क्षेत्र को शामिल करने की तैयारी है। इसके अलावा अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस, लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल और एक्सटेंडेड रेंज पिनाका प्रणाली के निर्माण में भी निजी उद्योग की भूमिका बढ़ने की संभावना है। यह पहल भारत को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और वैश्विक हथियार निर्यातक के रूप में मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

