भारत में रोजमर्रा के इस्तेमाल की न्यूजीलैंड की 6 खास चीजें

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-पीएम मोदी की यात्रा के बाद फिर आ गईं चर्चा में
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा के बाद दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंध एक बार फिर चर्चा में हैं। यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर सहमति जताई तथा वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस बीच यह भी ध्यान आकर्षित हुआ है कि न्यूजीलैंड के कई उत्पाद पहले से ही भारतीय बाजार में व्यापक रूप से उपलब्ध हैं और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
भारत में बिकने वाले अधिकांश आयातित कीवी फल न्यूजीलैंड से आते हैं। विटामिन-सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। फ्रूट सलाद, जूस और स्मूदी के अलावा बीमारी के दौरान भी चिकित्सक अक्सर इसके सेवन की सलाह देते हैं।
न्यूजीलैंड अपनी उच्च गुणवत्ता वाली ऊन के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां से आयातित प्रीमियम ऊन का उपयोग भारत में स्वेटर, शॉल, थर्मल वियर, कंबल और कालीन जैसे उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। सर्दियों के परिधानों के उद्योग में इसकी विशेष मांग बनी रहती है। इसी तरह मानुका शहद अपने प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण भारतीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। इसका उपयोग इम्युनिटी बढ़ाने, त्वचा की देखभाल, वेलनेस उत्पादों और स्वास्थ्य अनुपूरकों में किया जाता है। प्रीमियम गुणवत्ता के कारण इसकी कीमत सामान्य शहद की तुलना में अधिक होती है।
न्यूजीलैंड भारत को पाइन की लकड़ी और वुड पल्प का भी बड़ा निर्यातक है। इनका इस्तेमाल फर्नीचर निर्माण, इंटीरियर डेकोरेशन, पैकेजिंग उद्योग और समाचार पत्रों के लिए कागज बनाने में किया जाता है। यही नहीं जब देश में सेब का उत्पादन कम होता है, तब न्यूजीलैंड से आयातित गाला और क्वीन किस्म के सेब बाजार में मांग पूरी करते हैं। अपनी मिठास, कुरकुरे स्वाद और गुणवत्ता के कारण ये उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।
इसके अलावा, भारत तैयार डेयरी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध होने के बावजूद न्यूजीलैंड से विशेष डेयरी प्रोटीन आयात करता है। इनका उपयोग बेबी फूड, न्यूट्रिशन ड्रिंक, हेल्थ सप्लीमेंट्स और मेडिकल न्यूट्रिशन उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वानिकी और डेयरी क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा।