नई दिल्ली । ओडिशा के पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की सालाना रथ यात्रा का पावन शुभारंभ हो गया है। इस ऐतिहासिक और पवित्र अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई दी है। सुरक्षा बलों के कड़े पहरे और भारी बारिश की संभावनाओं के बीच महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के तीनों दिव्य रथ पुरी मंदिर के सिंहद्वार पर सजकर तैयार हैं, जहाँ आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस ऐतिहासिक उत्सव को भारत की अटूट आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
रथ यात्रा के पवित्र अवसर पर सभी को बधाई। यह भारत की सदाबहार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की शानदार अभिव्यक्ति है। रथ यात्रा से जुड़ी परंपराओं ने भारत और दुनिया भर में कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। ये परंपराएं विनम्रता, सामूहिक भागीदारी और निस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रतीक हैं। पीएम मोदी ने महाप्रभु से सभी की भलाई और खुशहाली की प्रार्थना करते हुए आगे कहा कि भगवान जगन्नाथ सभी को अच्छा स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद दें, ताकि समाज में एकजुटता की भावना और अधिक मजबूत हो सके। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस शुभ अवसर पर भारत और दुनिया भर के भक्तों को बधाई देते हुए इस त्योहार के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति के आधिकारिक हैंडल से साझा किए गए संदेश में कहा कि महाप्रभु की रथ यात्रा के शुभ अवसर पर, मैं देश-विदेश में श्री जगन्नाथ के सभी भक्तों को हार्दिक बधाई देती हूँ। ऐसी मान्यता है कि इस पावन जुलूस के दौरान महाप्रभु श्री जगन्नाथ चक्रराज सुदर्शन, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ स्वयं भक्तों से मिलने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं। भक्त और ईश्वर के मिलन का यह भावपूर्ण अवसर वास्तव में अद्वितीय और अलौकिक है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज और सुभद्रा का दर्पदलन रथ भक्तों की प्रतीक्षा में तैयार खड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन रथों की रस्सियों को खींचने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

