वांगचुक से मिले दो केंद्रीय मंत्री
नई दिल्ली । देश में गर्माए पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने सुलह का रुख अपनाते हुए बातचीत की कोशिशें तेज कर दी हैं। मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिले। दोनों मंत्रियों ने लगभग एक घंटे तक बातचीत कर पिछले 25 दिनों से जारी अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी।
हालांकि, वांगचुक ने सरकार के सामने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। उन्होंने मांग की कि आंदोलनकारी छात्रों पर कोई कानूनी या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न की जाए, पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के साथ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। उन्होंने बताया कि विभिन्न दलों के करीब 65 सांसदों ने पत्र लिखकर अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। इस बीच मेदांता अस्पताल के हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, 25 दिन में 11 किलो वजन घटने के कारण वांगचुक को आईसीयू में विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है। दूसरी ओर, आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार से बातचीत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री नड्डा के आवास पर जाने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछली बार उन्हें घंटों इंतजार कराया गया था, इसलिए यदि सरकार सचमुच संवाद चाहती है तो उसके प्रतिनिधियों को जंतर-मंतर आना होगा या कोई तटस्थ स्थान तय करना होगा। संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। जवाब में केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि सरकार संवेदनशील है, लेकिन विपक्ष इस मामले पर राजनीति कर रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कांग्रेस और सहयोगी दलों के शासन वाले राज्यों में हुए पेपर लीक पर चुप्पी साधे रहते हैं। नड्डा ने स्पष्ट किया कि वांगचुक के पत्र का जल्द ही औपचारिक जवाब दिया जाएगा।

