तमिलनाडु विधानसभा में कानून-व्यवस्था पर घमासान
चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ। विपक्षी दल डीएमके के विधायकों ने हाल ही में हुई हत्याओं का हवाला देकर जोरदार नारेबाजी की और मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। सदन में बढ़ते विरोध के बीच, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी सरकार का बचाव कर पुलिसिंग व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग को जनता का रक्षक बनना चाहिए, न कि कोई स्वतंत्र सत्ता का केंद्र। उन्होंने जोर दिया कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो। सीएम विजय ने कहा, मैं इस सदन में एक महत्वपूर्ण बात रखना चाहता हूँ, जहाँ तक पुलिस विभाग का सवाल है, उसे अच्छे लोगों का दोस्त और बुरे लोगों का दुश्मन होना चाहिए। कानून सभी के लिए समान है। जो कोई भी अपराध करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो। यही हमारी सरकार की नीति है।
पिछले कुछ महीनों में हुई आपराधिक घटनाओं पर सीएम विजय ने कहा कि इन्हें अचानक हुई घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें से कई के पीछे पुरानी रंजिश और बदले की भावना जैसे कारण होते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे इन घटनाओं का इस्तेमाल सत्ताधारी सरकार को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ड्रग्स की समस्या को राज्य के लिए एक बड़ा मुद्दा बताया, खासकर युवाओं के संदर्भ में, और खत्म करने की अपनी जाहिर की। उन्होंने कोयंबटूर में एक कॉलेज छात्र की हत्या के मामले का भी ज़िक्र किया, जिसमें 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।
सीएम विजय ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति की बता कह कर युवाओं में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल के पीछे साथियों के दबाव को एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने जानकारी दी कि सभी 37 जिलों में एंटी-ड्रग स्क्वाड बनाए गए हैं और पिछले तीन महीनों में एनडीपीएस एक्ट के तहत चेन्नई में 330 मामले दर्ज कर 556 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को होने से पहले रोकने की आवश्यकता पर जोर देकर बताया कि इस उद्देश्य से सरकार ने सिंगप्पेन स्पेशल फ़ोर्स का गठन किया है। उनकी इन बातों में कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करने, ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए रोकथाम-आधारित पुलिसिंग पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश निहित था।

