अनहोनी का डर ऐसा कि मां अनीता नहीं देखतीं थी मोबाइल

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दिपके के माता-पिता ने सुनाई दहशत की कहानी
संभाजीनगर । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनके माता-पिता की महीनों पुरानी चिंता राहत और खुशी में बदल गई है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में स्थित अपने आवास पर अभिजीत के माता-पिता बेहद भावुक नजर आए और उन्होंने इस सफलता को युवाओं के संघर्ष और अपने बेटे की ईमानदारी की जीत बताया।
अभिजीत की मां अनीता दिपके ने खुशी के आंसू पोछते हुए कहा, मैं बेहद खुश हूं, उसकी ईमानदारी और युवाओं के समर्थन से यह बड़ी जीत हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू होने के बाद से वे ठीक से सो भी नहीं पाती थीं और हर सुबह फोन देखने से डरती थीं कि कहीं कोई बुरी खबर न मिल जाए। उन्होंने कहा, आज मेरी आंखों में जो आंसू हैं, वे खुशी के हैं। मैं उससे जल्द घर आने को कहूंगी, उसे कसकर गले लगाऊंगी और उसकी आरती उतारूंगी।
अभिजीत के पिता भगवानराव दिपके ने संघर्ष के दिनों के डर को साझा करते हुए बताया कि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के राजनीति में कदम रखने के कारण पूरा परिवार लगातार डर के साए में जी रहा था। उन्होंने कहा, हम इतने डरे हुए थे कि जून में मैंने उसे अमेरिका से भारत न लौटने की सलाह दी थी। हम पर इतना दबाव था और धमकियां मिल रही थीं कि हम कुछ समय के लिए घर छोड़कर कोंकण चले गए थे। इस तनाव के कारण उनका स्वास्थ्य भी काफी बिगड़ गया था।
पिता ने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत पर दो बार हमले भी हुए और 20 जुलाई को पुलिस द्वारा खींचे जाने की घटना ने उन्हें गहराई से डरा दिया था। केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसे किसी की जीत या हार के रूप में देखने के बजाय एक बड़े दिल के फैसले के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इस्तीफा देते समय भी उन्होंने छात्रों के हितों के बारे में सोचा। भविष्य के राजनीतिक कदमों पर भगवानराव ने कहा कि अभिजीत ने राजनीति को करीब से देखा है और एक पिता के रूप में वे हमेशा अपने बेटे के साथ खड़े रहेंगे।