दो अफसरों ने की गड़बड़ी और आस्ट्रेलिया की शिक्षा मंत्री ने दे दिया इस्तीफा

अंतरराष्ट्रीय

-यवेट बेरी गलत नहीं थीं फिर भी ली जिम्मेदारी, इस कदम की लोग कर रहे चर्चा
कैनबरा भारत में नीट पेपर लीक मामले पर बवाल के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया से भी एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जहां शिक्षा मंत्री यवेट बेरी ने अपने कैबिनेट पद से इस्तीफे का ऐलान किया है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का ये मामला पेपर लीक से जुड़ा नहीं है और न ही यवेट बेरी खुद किसी गलत काम में शामिल थीं। जानकारी के मुताबिक उनके विभाग के दो बड़े अफसरों ने एक ऐसा कांड कर दिया, जिससे सरकार की किरकिरी होने लगी। इसके बाद मामला तूल पकड़ता देख यवेट बेरी ने अपने अफसरों की नाकामी और गलती की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब डिप्टी चीफ मिनिस्टर और शिक्षा मंत्री यवेट बेरी ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ये बड़ा कदम तब उठाया जब क्षेत्र के इंटीग्रिटी कमीशन ने उनके विभाग के दो बड़े अफसरों को भ्रष्टाचार का दोषी पाया। कमीशन की जांच में यवेट बेरी के खिलाफ कुछ भी गलत नहीं निकला और न ही उन्हें इसमें सीधे तौर पर शामिल पाया गया। इसके बावजूद, उन्होंने अपने विभाग में हुई इस गड़बड़ी और अपने विभाग में काम करने वाले अफसरों के रवैये की ‘पूरी जिम्मेदारी’ लेते हुए हटना छोड़ दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक यवेट बेरी का ये कदम इस समय ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में काफी चर्चा में है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मंत्री होने के नाते उनके विभाग में जो कुछ भी होता है, उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। बेरी ने साफ किया कि भले ही कमीशन ने उन्हें सीधे तौर पर दोषी नहीं माना, लेकिन जब विभाग के बड़े अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो चुके हैं, तो उनका पद पर बने रहना ठीक नहीं होगा। इस्तीफे का ऐलान करते हुए यवेट बेरी बेहद भावुक लेकिन सख्त नजर आईं। उन्होंने कहा कि सरकार और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति जनता का भरोसा सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कमीशन की रिपोर्ट बेहद गंभीर है। एक मंत्री के रूप में, मैं अपने विभाग के हर काम की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं और इसीलिए मैं कैबिनेट से अपना इस्तीफा दे रही हूं।
यवेट बेरी के इस्तीफे के बाद एसीटी की राजनीति में उथल-पुथल मच गई। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार और मुख्यमंत्री को सीधे निशाने पर ले लिया। विपक्ष का कहना है कि सिर्फ एक मंत्री के कुर्सी छोड़ देने से बात खत्म नहीं हो जाती, असली सवाल तो ये है कि सरकार की नाक के नीचे इतने सालों से ये भ्रष्टाचार कैसे पनप रहा था? विपक्षी नेताओं ने ये भी सवाल दागा कि क्या सरकार के बाकी विभागों में भी पर्दे के पीछे ऐसा ही खेल चल रहा है?