भारत के 114 राफेल जेट के लिए भेज लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट का अगस्त में जवाब देगा फ्रांस

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-फ्रांस का जवाब मिलने के बाद नई दिल्ली और पेरिस के बीच शुरु होगी जी2जी की बातचीत
नई दिल्ली । फ्रांस इस साल अगस्त के मध्य तक भारत द्वारा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भेजे गए लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट का जवाब दे सकता है। भारत ने इस साल मई में फ्रांस को यह लेटर भेजा था, जिस पर फ्रांसीसी अधिकारियों ने अध्ययन के लिए अगस्त तक का समय मांगा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस का जवाब मिलने के बाद नई दिल्ली और पेरिस बातचीत के लिए बैठेंगे।
भारत ने इस साल मई में फ्रांस को लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट भेजा था ताकि भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए जी2जी डील पर बातचीत शुरू की जा सके। इस प्रस्ताव के तहत 94 विमानों का निर्माण भारत में फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा, जिससे घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह खरीद आईएएफ के लिए बहुत अहम है। पुराने हो रहे विमानों के रिटायर होने और एलसीए मार्क 1ए और आने वाले एलसीए मार्क-2 जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स को शामिल करने में देरी के कारण आईएएफ के स्क्वाड्रन की संख्या लगातार कम हो रही है।
भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल जेट का ऑर्डर दे चुकी हैं। अगर 114 विमानों की डील फाइनल हो जाती है, तो भारत के राफेल बेड़े में विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। भारतीय नौसेना ने भी समुद्री ऑपरेशन्स के लिए 31 और राफेल खरीदने की इच्छा जताई है, जिससे देश के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 200 से ज़्यादा हो सकती है। यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय द्वारा आईएएफ की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
बता दें 2024 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के पद संभालने के बाद मंत्रालय ने वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों की व्यापक समीक्षा की थी। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने चार महीने से भी पहले आईएएफ के 114 राफेल फाइटर्स खरीदने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी, जिससे बातचीत के अगले चरण का रास्ता साफ हो गया था। पिछले महीने, फ्रांस ने संकेत दिया था कि वह राफेल फाइटर जेट के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इन विमानों में भारत में बने हथियारों और सिस्टम को लगाने को लेकर पूरी तरह सहमत है। फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि मेक इन इंडिया इस डील का एक अहम हिस्सा होगा।