नई दिल्ली । राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को दोनों सदनों ने पारित कर दिया। इस ऐतिहासिक विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करने को राष्ट्रीय गान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े मौजूदा प्रावधानों के समान ही दंडनीय अपराध बनाना है।
सदन में तीखी बहस और विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच यह विधेयक दोनों सदन से पारित हुआ। इस नए कानून के लागू होने के बाद, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करता है या इस गाने में बाधा डालता है, तब उस गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें तीन साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों की सजा का प्रावधान है। यह कदम राष्ट्रगान जन गण मन की तरह ही वंदे मातरम को भी कानूनी सुरक्षा देगा। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग कर सदन से वॉकआउट कर दिया। सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी सहित कई सदस्यों ने पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर उठाने का प्रयास किया, लेकिन उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने सदन में व्यवस्था न होने का हवाला देकर इसकी अनुमति नहीं दी। आप के संजय सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इस उस पार्टी द्वारा पेश किया गया है जिसके मूल संगठन ने कभी अपने मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया।
लेकिन गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के विरोध का जवाब देकर कहा कि यह संशोधन केवल एक विधायी बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने वंदे मातरम के गहरे ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा इसकी रचना, 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसका गायन और सरला देवी चौधरानी द्वारा 1905 में इसका पूरा संस्करण प्रस्तुत करना शामिल है। राय ने 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा गीत को केवल दो छंदों तक सीमित करने के फैसले की आलोचना की और 1938 में सुभाष चंद्र बोस के इसके पूर्ण संगीत संयोजन को तैयार कराने के प्रयासों का भी जिक्र किया। राय ने सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर 1947 में स्वतंत्रता दिवस पर ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित पूरे गीत और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें वंदे मातरम और राष्ट्रगान को समान दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि बिल का विरोध करना राष्ट्रीय नेताओं के विचारों को नजरअंदाज करने और तुष्टीकरण की राजनीति के समान है। मोदी सरकार में मंत्री ने चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्लाह खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया, जिन्होंने अपने अंतिम क्षणों में वंदे मातरम का नारा लगाया था। राय ने तर्क दिया कि गीत का विरोध करने से उन लोगों का मनोबल बढ़ता है जो भारत के टुकड़े करने के नारे लगाते हैं। उन्होंने बिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत के विजन से जोड़ते हुए राजनीति से ऊपर उठकर उठाया गया कदम बताया, जो भारतीय लोगों की भावनाओं को दर्शाता है। तीखी बहस और विपक्ष के वॉकआउट के बाद, विधेयक को दोनों सदनों ने पारित कर दिया।

