कई लोगों के दबे होने की आशंका
मुंबई ।मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर तबाही मचाई है। बुधवार तड़के भारी बारिश के कारण शहर के अलग-अलग इलाकों में भूस्खलन और घरों के ढहने की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। कुर्ला के चिराग नगर और घाटकोपर के अशोकनगर इलाके में पहाड़ का हिस्सा गिरने और चॉल ढहने की चपेट में आने से कई लोगों की जान चली गई है, वहीं मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है।
हादसा बुधवार सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच हुआ, जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक हुए भूस्खलन के कारण गौसिया चॉल समेत अन्य मकान मलबे में तब्दील हो गए। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन दल, पुलिस, एंबुलेंस और राहत एवं बचाव टीमों ने फौरन मोर्चा संभाल लिया। बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मलबे को हटाने के लिए मशीनों और उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है और घायलों को निकालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंच चुके हैं ताकि राहत कार्यों की निगरानी की जा सके और पीड़ितों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके। हर साल मानसून के दौरान मुंबई में इस तरह के हादसे चिंता का विषय बनते हैं। पहाड़ों के ढलान और असुरक्षित इलाकों में बनी चॉल व अस्थाई मकान बारिश में सबसे ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। प्रशासन और बचाव एजेंसियां समय-समय पर लोगों को ऐसे क्षेत्रों को खाली करने की चेतावनी देती रही हैं और सतर्क रहने की अपील करती हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग इन असुरक्षित घरों में रहने को मजबूर हैं। ये निर्माण न केवल भौगोलिक रूप से जोखिम भरे क्षेत्रों में होते हैं, बल्कि बारिश का दबाव झेलने में भी असमर्थ साबित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी जानलेवा घटनाएं होती हैं। इस बीच, मौसम विभाग ने मुंबई और आसपास के क्षेत्रों—जैसे ठाणे, पालघर और रायगढ़—के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। शहर में मानसून की बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने पहले ही जलभराव की समस्याएं पैदा कर दी हैं, और अब इन भूस्खलनों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। फिलहाल पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों और जर्जर मकानों के पास जाने से बचें और अत्यधिक सतर्कता बरतें।

