खतरनाक नमी वाली गर्मी के मामले में भारत दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित देश
नई दिल्ली । जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच भारत में उमस भरी खतरनाक गर्मी का खतरा बढ़ रहा है। एक स्टडी में सामने आया है कि खतरनाक नमी वाली गर्मी के संपर्क के मामले में भारत दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन गया है। अध्ययन के मुताबिक दुनियाभर में ऐसी गर्मी के संपर्क में आने वाली आबादी पर पड़ने वाले बोझ का करीब आधा हिस्सा भारत पर है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 1950 से 2020 तक के वैश्विक मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में गर्मी और नमी के संयुक्त प्रभाव को समझने के लिए वेट बल्ब ग्लोब टेम्परेचर और ह्यूमिडेक्स जैसे मानकों का इस्तेमाल किया गया।
जानकारी के मुताबिक अध्ययन में 33 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा डब्ल्यूबीजीटी को बहुत ज्यादा नमी वाली गर्मी की श्रेणी में रखा गया है। इस स्तर की गर्मी मानव शरीर की खुद को ठंडा करने की क्षमता को प्रभावित करती है और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर गंभीर हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक केवल तापमान बढ़ना ही स्वास्थ्य के लिए चुनौती नहीं है। हवा में नमी ज्यादा होने पर पसीना तेजी से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। यही वजह है कि समान तापमान पर ज्यादा उमस वाली परिस्थितियां कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं।
भारत की बड़ी आबादी गर्म और आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में तापमान के साथ बढ़ती नमी का संयुक्त प्रभाव आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य, कामकाजी क्षमता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। अध्ययन इस बात की ओर भी संकेत करता है कि भविष्य में गर्मी से जुड़े जोखिमों का आकलन केवल अधिकतम तापमान के आधार पर करने के बजाय तापमान और नमी दोनों के संयुक्त प्रभाव को ध्यान में रखकर करना जरूरी होगा।

