जनसंख्या पर भागवत और सीएम विजय की एक सोच: शशि थरूर ने कहा……कॉमन सेंस

ताज़ा खबर देश-विदेश

नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय राजनीतिक और सामाजिक जनसांख्यिकी पर एक दिलचस्प लेख की सराहना की है, जिसमें उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय जैसी विविध शख्सियतों के बीच एक दुर्लभ समानता बता दी है। कांग्रेस सांसद थरूर ने विश्लेषण को कॉमन सेंस से भरपूर बताया है। दरअसल, एक पत्रकार ने एक लेख साझा कर सवाल किया था कि एलन मस्क, एमके स्टालिन, केरल के एक कैथोलिक बिशप, एन चंद्रबाबू नायडू, सी जोसेफ विजय और मोहन भागवत में क्या समानता है? इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पत्रकार के काम की तारीफ कर लिखा कि यह आज की राजनीति में लगातार चलने वाले मुद्दे का बहुत ही सोच-परख विश्लेषण, उस दुर्लभ चीज-कॉमन सेंस की डोज से भरपूर है! लेख के मुताबिक, इन सभी शख्सियतों में यह समानता है कि ये अपने लोगों से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने को कह रहे हैं। हालांकि, इन सभी के अधिक बच्चे पैदा करें के आह्वान के पीछे की वजहें और लक्ष्य बेहद भिन्न हैं।
दक्षिणी भारत के नेता जैसे तमिलनाडु के सीएम विजय, आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के पूर्व सीएम स्टालिन की चिंता परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों में संभावित कमी को लेकर है। इन राज्यों ने परिवार नियोजन कार्यक्रमों में सफलता हासिल की है, जिससे उनकी आबादी स्थिर रही है, लेकिन उन्हें डर है कि उत्तरी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि के कारण भविष्य के परिसीमन में उन्हें संसद में कम प्रतिनिधित्व मिलेगा।
वहीं, केरल के एक कैथोलिक बिशप की चिंता ये हैं कि ईसाई समुदाय की बदलती जनसांख्यिकी से जुड़ी है। उन्हें लगता है कि ईसाइयों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है और बड़ी संख्या में लोग बाहर गए हैं, जिससे राज्य की पूरी जनसांख्यिकी बदल गई है। ईसाई संगठनों को आशंका है कि भविष्य में यह कम जनसंख्या उनके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
वहीं आरएसएस प्रमुख भागवत भारत में प्रति परिवार तीन बच्चों की वकालत करते हैं। वे इसके लिए जनसांख्यिकी विज्ञान का हवाला देकर कुछ क्षेत्रों में हिंदुओं के तेजी से अल्पसंख्यक होने या होने की आशंका पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी अरबपति एलन मस्क का मानना है कि जन्म दर में गिरावट लंबे समय में मानवीय सभ्यता के लिए खतरा पैदा कर सकती है, इसलिए वे अधिक बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं। इस प्रकार, ये सभी व्यक्तित्व अधिक बच्चे पैदा करें की एक समान सोच रखते हैं, लेकिन इसके पीछे उनके लक्ष्य और चिंताएं पूरी तरह से अलग-अलग हैं, जो भारत की जटिल सामाजिक-राजनीतिक तस्वीर को दर्शाती हैं।