दिव्यांग बेटे के लिए 80,000 प्लास्टिक बोतलों से बना आशियाना

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ढाका । प्लास्टिक की खाली बोतलें, जिन्हें अक्सर कूड़ा मानकर फेंक दिया जाता है, वही बांग्लादेश के एक दंपति के लिए न केवल एक घर बनाने का माध्यम बनीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण भी बन गईं। लालमोनिरहाट जिले के एक दूरदराज गांव में राशेदुल आलम और असमा खातून ने लगभग 80 हजार प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल कर 1700 वर्ग फुट का एक विशाल घर बनाया है। उनके इस असाधारण कदम का मुख्य उद्देश्य अपने दिव्यांग बेटे के लिए एक सुरक्षित और अलग तरह का आशियाना तैयार करना था, साथ ही यह संदेश देना भी था कि प्लास्टिक कचरे का रचनात्मक इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। 2017 में निर्मित यह घर आज भी प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने और टिकाऊ निर्माण के तरीके सिखाने का एक जीवंत प्रतीक है।
राशेदुल और असमा, दोनों पर्यावरण विज्ञान के छात्र रहे हैं। अपने दिव्यांग बेटे के लिए एक ऐसे घर की कल्पना की जो न केवल कार्यात्मक हो, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी हो। उनकी यह पहल बांग्लादेश में अपनी तरह की पहली थी। बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के आर्किटेक्चर विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर ने भी इसे पर्यावरणीय दृष्टिकोण से एक अभिनव और सराहनीय प्रयास बताया, जो पारंपरिक निर्माण सामग्री पर निर्भरता को कम करता है। इस अनूठी परियोजना को साकार करने के लिए दंपति ने हजारों प्लास्टिक बोतलों में रेत भरी। ये रेत भरी बोतलें ही उनकी दीवारों की मूल इकाई बनीं। बोतलों को मजबूत बनाने के लिए रेत और सीमेंट के मिश्रण से जोड़ा गया, जबकि घर का मूल ढांचा ईंट के टुकड़ों और लोहे की छड़ों से तैयार किया गया। इस घर में चार बेडरूम, एक किचन, डाइनिंग रूम और दो बाथरूम शामिल हैं, साथ ही एक हवादार बरामदा भी है। दरवाजे और खिड़कियां स्टील और लकड़ी से बनाई गई हैं, और छत के लिए टिन की चादरों का उपयोग किया गया है, जो स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने में कई चुनौतियाँ सामने आईं। सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा करना था। राशेदुल ने बताया कि उन्हें ये बोतलें औद्योगिक क्षेत्र के अधिकारियों और स्थानीय बोतल विक्रेताओं से खरीदनी पड़ीं। बोतलों की व्यवस्था के बाद दूसरी बड़ी समस्या स्थानीय निर्माण मजदूरों को इस नई तकनीक के लिए तैयार करना था। शुरुआत में, मजदूर प्लास्टिक की बोतलों से बनने वाले घर की मजबूती और स्थायित्व को लेकर संशय में थे, लेकिन दंपति ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यह ढांचा पारंपरिक घरों जितना ही मजबूत और टिकाऊ हो सकता है।