वडोदरा इंटरनेशनल गरबा फेस्टिवल-2026 में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब
- लक्ष्मी विलास पैलेस से नवलखी मैदान तक गूंजे गरबे के सुर, विदेशी प्रतिनिधियों ने भी थिरककर लिया उत्सव का आनंद
वडोदरा । गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और भक्ति की अनूठी छटा ने विदेशी राजनयिकों और प्रतिनिधिमंडल का दिल जीत लिया। विश्वविख्यात गरबा महोत्सव में हजारों खेलैयाओं के एक साथ थिरकने, पारंपरिक संगीत की गूंज और मां आद्यशक्ति की आराधना से ऐसा माहौल बना कि विदेशी मेहमान भी खुद को गरबा खेलने से नहीं रोक सके। वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी के नेतृत्व में आयोजित ‘वडोदरा इंटरनेशनल गरबा फेस्टिवल-2026’ में विदेशी मेहमानों ने गुजरात की समृद्ध परंपरा को करीब से महसूस किया। - लक्ष्मी विलास पैलेस में आरती, नवलखी मैदान में गरबे की धूम
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मी विलास पैलेस में मां आद्यशक्ति की आरती और पारंपरिक गरबा रहा। माता की आराधना के साथ शुरू हुए आयोजन में खेलैयाओं ने पूरे उत्साह के साथ गरबा किया। पारंपरिक वेशभूषा, संगीत की लय और भक्तिमय वातावरण ने विदेशी प्रतिनिधियों को खासा प्रभावित किया। गरबा मैदान में उमड़े उत्साह को देखकर विदेशी मेहमान भी मंदिर परिसर में गरबा खेलने लगे।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने नवळखी मैदान में आयोजित वडोदरा नवरात्रि महोत्सव में शिरकत की। यहां हजारों लोगों को एक साथ गरबा करते देख विदेशी मेहमान गुजरात की सामूहिक उत्सव परंपरा से रूबरू हुए। मैदान में गूंजते गरबे के सुर और खेलैयाओं का जोश आयोजन को यादगार बना रहे थे। - स्वीडन की पूर्व सांसद बोलीं – संगीत और परंपरा ने मोहा मन
स्वीडिश संसद की पूर्व सदस्य पेनेलोप ने गरबा महोत्सव का आनंद लेने के बाद गुजरात की सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां का संगीत, नृत्य, पारंपरिक परिधान और लोगों का उत्साह उन्हें मंत्रमुग्ध कर गया। उन्होंने गुजरात की परंपरा, कला और संस्कृति के साथ आधुनिक उद्योगों तथा भविष्य के विकास के समन्वय की भी प्रशंसा की। उनके मुताबिक, वडोदरा में परंपरा और आधुनिकता का मेल शहर के अनुभव को खास बनाता है। - उरुग्वे के अल्बर्टो ने बताया अनूठी परंपरा
उरुग्वे के अल्बर्टो ने भी गरबा की भव्यता और वैश्विक आकर्षण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गरबा दुनिया की अनूठी और भव्य सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। भारत के गतिशील राज्यों में शामिल गुजरात में इस तरह के आयोजन को देखकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों पर हर व्यक्ति को गर्व और खुशी महसूस करनी चाहिए। - भक्ति, संस्कृति और एकता का वैश्विक मंच बना गरबा
वडोदरा का गरबा महोत्सव केवल नृत्य और संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि गुजरात की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। एक ओर मां आद्यशक्ति की आराधना, तो दूसरी ओर हजारों खेलैयाओं का एक साथ थिरकना इस अनूठे संगम ने विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई।
विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यह अनुभव केवल गरबा देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शामिल होकर गुजरात की परंपरा को महसूस करने का अवसर भी बना। लक्ष्मी विलास पैलेस से नवलखी मैदान तक गरबे की गूंज ने वडोदरा की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई चमक दी।

