विद्याधाम में सम्मानित, मार्कण्डेय पुराण की 241 पांडुलिपियों का भी किया अध्ययन ::
इंदौर । दुर्गा सप्तशती के पाठभेद और श्लोक संख्या पर संस्कृत में शोध तथा मार्कण्डेय पुराण की 241 पांडुलिपियों के अध्ययन के लिए विद्याधाम के आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री को महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन ने विद्यावाचस्पति की उपाधि प्रदान की है। इस उपलब्धि पर विमानतल मार्ग स्थित विद्याधाम में महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में उनका सम्मान किया गया।
पं. शास्त्री ने “श्रीदुर्गा सप्तशत्याः श्लोक संख्या पाठभेदयोः समीक्षात्मकमध्ययनम्” विषय पर संस्कृत में शोध कार्य पूरा किया है। इसके साथ ही उन्होंने मार्कण्डेय पुराण की 241 पांडुलिपियों का अध्ययन और विश्लेषण भी किया। विश्वविद्यालय में आयोजित साक्षात्कार के दौरान शोध निदेशक डॉ. तुलसीदास परोहा और दिल्ली से ऑनलाइन जुड़े बाह्य परीक्षक की उपस्थिति में कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने उन्हें उपाधि प्रदान करने की घोषणा की और शोधग्रंथ भेंट किया।
:: विद्याधाम में किया सम्मान ::
उपाधि मिलने पर विद्याधाम में आश्रम के न्यासी मंडल की ओर से पं. शास्त्री का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वामी शिवानंद सरस्वती, न्यासी राजेंद्र महाजन, ममता शुक्ला, रेणुका गुप्ता और स्वामी गिरिजानंद सरस्वती वेद-वेदांग विद्यापीठ के वेदपाठी बटुक उपस्थित रहे।
पं. शास्त्री ने अपनी उपलब्धि का श्रेय ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन’ और भगवती की कृपा को देते हुए सम्मान श्री श्रीविद्याधाम को समर्पित करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने प.पू. भगवन के सानिध्य में कर्मकांड की शिक्षा प्राप्त की है। वे देश के चारों धामों सहित अनेक तीर्थस्थलों पर भागवत ज्ञान यज्ञ भी कर चुके हैं।

