अगर हिम्मत है, तो राजनीतिक रूप से मुकाबला करो, हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं

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-पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी और प्रशासनिक तंत्र पर लगाए गंभीर आरोप
कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर है.। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बीजेपी और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोलकाता में बनर्जी ने कहा कि राज्य में पिछले कुछ दिनों से पुलिसिया अत्याचार और प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है, जिसके जरिए टीएमसी कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों को डराया-धमकाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों और सत्ताधारी खेमे के बीच एकतरफा माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कल से पुलिस का अत्याचार बहुत बढ़ गया है। आयोग ने हमसे सभी दस्तावेज जमा करने को कहा है। लोगों को जिलाधिकारियों, बीडीओ, थाना प्रभारियों और एसपी के जरिए धमकाया जा रहा है। सरकार उन्हें कानूनी कागजात, स्टाम्प पेपर और नोटरीकृत हलफनामे मुहैया करा रही है, जबकि हमारे लिए हर रास्ता बंद कर दिया गया है।
उन्होंने यहां तक कहा कि जो लोग व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मिलने आना चाहते हैं, उन्हें उनके दफ्तर तक आने की अनुमति नहीं दी जा रही है। देश के लोकतंत्र और स्वतंत्रता के इतिहास का हवाला देते हुए टीएमसी प्रमुख ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर जमकर भड़ास निकाली, उन्होंने कहा कि क्या हम स्वतंत्र हैं? क्या इस देश में अब हमारे पास कोई स्वतंत्रता बची है? हमारे महान नेताओं ने देश की आजादी के लिए अपनी जानें कुर्बान की थीं और आज हमें यह देखना पड़ रहा है कि बीजेपी पैसे के बल पर लोगों को खरीद रही है और हमारे कार्यकर्ताओं, विधायकों व सांसदों को टीएमसी में शामिल होने पर जेल भेजने की धमकी दे रही है।
बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि क्या यह व्यवहार करने का कोई तरीका है? अगर आप में हिम्मत है, तो राजनीतिक रूप से मुकाबला करिए। हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। ममता के इस तीखे बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। टीएमसी लगातार आरोप लगा रही है कि केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, बीजेपी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया है कि ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख बौखला गई हैं और प्रशासनिक नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही हैं।