प्रधानमंत्री मोदी ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में लिया हिस्सा

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विदेशी प्रतिनिधियों से की बातचीत
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। मंच का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करना और जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार-विमर्श करना है।
इस कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारी, संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की। उन्होंने विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संवाद, आपसी सम्मान और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने उद्घाटन संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी और उनकी साझा प्रतिबद्धता विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स संसदीय सहयोग संवाद, आपसी सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों में साझा विश्वास का प्रतीक है।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने बताया कि ब्रिक्स संसदीय मंच इस वर्ष अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का लगातार विस्तार हो रहा है और वैश्विक घटनाक्रमों तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता भी बढ़ रही है। लोकसभा स्पीकर बिरला के अनुसार, ब्रिक्स देश दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा, इनका वैश्विक भू-भाग, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषा और सामाजिक विविधताओं के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी उन्हें एकजुट करती है। न्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त बयान को सर्वसम्मति से अपनाए जाने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और सदस्य देशों के प्रति आभार जताया।
लोकसभा स्पीकर बिरला ने कहा कि संसदें अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने, देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करने की जरूरत पर जो दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की प्राथमिकताएं केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें व्यावहारिक परिणामों में बदलना भी जरूरी है।