इंदौर में कचरा गाड़ियों का शोर 75% कम करने के निर्देश, हर थाने में तैनात होंगे साउंड मीटर
इन्दौर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जय कुमार पिल्लई की युगलपीठ ने शहर में बेकाबू होते ध्वनि प्रदूषण और त्योहारों के दौरान हुए अत्यधिक शोर को लेकर अमिताभ उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते पुलिस और नगर निगम प्रशासन को फटकार लगाते हुए कई ऐतिहासिक और सख्त निर्देश जारी किए हैं। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि सूचना देने के नाम पर आम जनता को कानूनन तय सीमा से ज्यादा शोर से परेशान नहीं किया जा सकता।
कोर्ट द्वारा जारी किए गए मुख्य दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं –
- कचरा गाड़ियों की आवाज होगी 75% कम: नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों में बजने वाले स्वच्छता गीत की आवाज को लेकर कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है। अब इन गाड़ियों के लाउडस्पीकर की आवाज को मौजूदा स्तर से 75% तक कम करना होगा। कचरा गाड़ियों की आवाज अब केवल 25% क्षमता या वैध डेसिबल सीमा के भीतर ही रखी जा सकेगी।
- हर थाने में उपलब्ध होंगे साउंड मीटर: ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों की मौके पर ही सटीक जांच करने के लिए इंदौर के सभी पुलिस थानों में ध्वनि मापक यंत्र (साउंड मीटर) अनिवार्य रूप से रखे जाएंगे। इससे पुलिस बिना किसी देरी के शोर के स्तर को मापकर कार्रवाई कर सकेगी।
- थानों के नंबर होंगे सार्वजनिक: आम जनता की सुविधा के लिए सभी थानों के संपर्क नंबर प्रमुख समाचार पत्रों, मीडिया और पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे। आम नागरिक ध्वनि प्रदूषण की शिकायत सीधे अपने नजदीकी थाने में कर सकेंगे।
- वार्ड स्तर पर तैनात होंगे वॉलिंटियर्स: कानूनी या पुलिसिया कार्रवाई के डर से शिकायत न कर पाने वाले नागरिकों की मदद के लिए अब वार्ड स्तर पर स्वयंसेवक (वॉलिंटियर्स) तैनात किए जाएंगे। ये वॉलिंटियर्स अवैध रूप से शोर मचाने वाले वाहनों या डीजे का वीडियो और ऑडियो सबूत बनाकर सीधे पुलिस को सौंपेंगे, जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- साइलेंस जोन की नई सूची होगी प्रकाशित: कोर्ट ने पूर्व में साइलेंस जोन (अस्पताल, स्कूल, कोर्ट आदि के आसपास के क्षेत्र) की सूची का ठीक से प्रचार-प्रसार न होने पर नाराजगी जताई। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे प्रमुख अखबारों में दोबारा इस सूची को प्रकाशित करें और नए क्षेत्रों को साइलेंस जोन में जोड़ने के लिए जनता से सुझाव मांगें।
3 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट –
कोर्ट ने नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को इन सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और 3 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में की जाएगी।

