ग़ज़ल

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ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै,
 
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै,
मुझसेहरवक़्तझगड़तीहै।
 
नजानेक्यों, मैंउसकोनहीं,
वोमुझकोनहीसमझतीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै….
 
कैसेमैंसमझाऊंउसे,
कितनाप्यारमैंकरताहूँ,
मेरीमगर, वोएकनहीसुनतीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै….
 
मैंजाऊँजिधर, वोदिलमेमेरेरहतीहै,
मुझपेशायद, बिश्वासवोकमकरतीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै…..
 
छुपाउससेकभी, कोईकामनहीकरताहूँ,
मुझसेमगर, कभीकभीवोछुपतीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै…..
 
कभीतोसमझलोमुझको,
समझकेभी, मुझकोनहीसमझतीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै,
मुझसेहरवक़्तझगड़तीहै,
ज़िन्दगीनाराज़बहुतरहतीहै।
 
राजीवरंजनसिन्हाकुंदन

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