कृषि निर्यात नीति में स्थानीयता पर जोर

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नयी दिल्ली 09 दिसंबर (वार्ता) वैश्विक विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय तथा जापान के खाद्य बाजाराें की मांग को देखते हुए राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति में स्‍वदेशी, नवीन, जैविक, स्‍थानीय प्रजाति, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक कृषि उत्‍पादों के निर्यात पर जोर दिया गया है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय निर्यात की वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति है लेकिन इसे बढ़ाने के लिए नये उत्पाद और नये बाजार जरूरी हैं। अमेरिका और यूरोप और पूर्वी एशिया भारतीय उत्पादों के परंपरागत बाजार हैं लेकिन इनमें खाद्य उत्पादों की नयी संभावनायें बन रही है। इसके अलावा इन देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग भी भारतीय उत्पादों की मांग करते हैं।
उन्होंने बताया कि कृषि निर्यात नीति में स्पष्ट तौर पर ऐसे उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिनकी विदेशों में भारी मांग है और इनकी पैदावार भारत के विभिन्न हिस्सों में हो रही है। यह नीति एक बुनियादी ढ़ांचा तैयार करेगी और भारत के दूर दराज के किसानों और अंतर्राष्ट्रीय बाजार को जोड़ेगी। कृषि उत्‍पादों के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाने के लिए एक संस्‍थागत प्रणाली विकसित करना तथा इनके व्‍यापार के रास्‍ते में आने वाली बाधाओं को दूर करना और इनसे जुड़े पादप-स्‍वच्‍छता के मामलों को निपटाना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
सत्या अर्चना
जारी वार्ता

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