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लखनऊ 21 दिसम्बर (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर समाज में नफरत और दूरी पैदा करने का आरोप लगाते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा है कि विभिन्न राजकीय विभागों तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं तक की नियुक्तियों में जाति का वर्चस्व दिखाई देने लगा है।
श्री यादव ने यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा नेतृत्व समझता है कि जातीय वैमनस्य पैदा करके वह अपने वोट बैंक में इजाफा कर लेगा। इसलिए विभिन्न राजकीय विभागों तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं तक की नियुक्तियों में जाति का वर्चस्व दिखाई देने लगा है।
उन्होने कहा कि भाजपा सरकार को संविधान में कोई आस्था नहीं है। समाज को बहकाने, भटकाने की कला में भाजपा की दक्षता का जवाब नहीं है। विपक्ष पर झूठे आरोप लगाने में उसे कोई संकोच नहीं होता है। इन दिनों वह विभिन्न समाजों के बीच खाई पैदा करने में लगी है। जाति की राजनीति खुलकर भाजपा राज में चल रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए कोई भी पाप कर सकती है, चाहे समाज को इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़ें। समाजवादी जाति की संकीर्णता से दूर रहे हैं। समाजवादी विचारधारा सामाजिक भेदभाव की भी विरोधी है। वह व्यक्ति की गरिमा एवं सामाजिक सद्भाव की पक्षधर है। समाज को तोड़ने के बजाय समाज को जोड़ना समाजवादी नीति एवं कार्यक्रम में शामिल है।
उन्होने कहा कि बंटवारे की राजनीति लोकतंत्र पर कब्जा करने की भाजपा रणनीति का ही हिस्सा है। भाजपा ने अब तक देश में सिर्फ विघटनकारी नीतियों को ही प्रोत्साहित किया है। लोग परेशान हों तो भाजपा नेतृत्व को परपीड़ा का सुख मिलता है। देश का किसान, नौजवान, अल्पसंख्यक सभी भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के शिकार हैं। जनता में इससे जो आक्रोश है उसका विस्फोट 2019 में होना तय है।

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