*पैबन्द*

मैं आज आफिस से आधा घण्टे पहले ही छूट गई । आज का दिन  मेरे लिए बहुत लकी था । मेरे लगन और ईमानदारी से इम्प्रेस हो मुझे कंपनी में डायरेक्टर बना दिया गया था। खुशी खुशी में बाहर आई कैब लेकर चल दी । में मंदिर गई लेकिन भगवान के दर्शन न कर सकी तो अपने लिए शॉपिंग करने चली आई। मैंने  दुकान सेअपने लिए एक  साड़ी और कुर्ता खरीदा जो सिंपल ओर सुँदर था। ट्रायल रूम में जाकर ट्राय किया तो लगा कि ये कुर्ता मुझे थोड़ा लूज़ आ रहा है। में कपडे चेंज कर रूम से बाहर निकल ही रही थी कि फ़ोन की रिंग बजने लगी।।

मैं- जी मम्मीजी बोलिये ।

मम्मी – बेटा आते समय मार्किट वाले मंदिर में प्रसाद चढ़ा आना।

मैं – मम्मी जी में गई थी पर वह रेनुअशन चल रहा है तो बाहर से ही दर्शन कर लिए।

मम्मी – ठीक है तो घर के लिए निकल चुकी हो ना ।

मैं- नही मम्मी जी शाॅपिंग कर रही हूँ ।

मैंने एक कुर्ता और एक साड़ी ली है। साड़ी तो बहुत ही सुँदर है मम्मीजी

मम्मी – बेटे कितनी साड़ियाँ लोगी तुम पहनती तो नही हो।

मैं- मम्मी  आज मेरा प्रमोशन हुआ है तो इसीलिए।

सासु बीच मे बात काटते हुए अच्छा ठीक है तुम जल्दी घर आ जाओ।

मैं – ओके कहकर फ़ोन रखती हूँ  ।

शाॅपकीपर से – मुझे टॉप में एक साइज छोटा दीजिये ये मुझे फिट नही आ रहा  है।

शॉपकीपर -मैडम यही लास्ट पीस बचा है आप कोई और देख लीजिए ।

मैं – भैया मुझे यही पसंद है । आप आल्टर करा दीजिये ।

शॉपकीपर –  मैडम हमारा मास्टर तो आज  नही आया है आप सामने जाइये सामनेवाला चाचा कर देगा ।

मैने शॉपकीपर को बिल अमाउंट दिया और चल दी । 

रोड क्रॉस करके सामने बैठे टेलर  चाचा  को कहा 

मैं – चाचा मेरा ये कुरता थोड़ा टाइट करना है 

टेलर चाचा  – हां मैडम आप  बैठिये में कर देता हूं और में  टेबल पर बैठ कर वाट्सएप  चेक करने लगी ।आज वाट्सएप  पर बधाइयों का अंबार लग गया था । मास्टर चाचा ने मेरा कुर्ता सीलना स्टार्ट कर दिया था।

तभी एक अधेड़ उम्र की महिला आई और मास्टर चाचा से करुणा भरे भाव से कहने लगी ।

चाचा – साड़ी में मैचिंग करता हुआ पैबन्द लगा दो ।

मास्टर – इस साड़ी में पहले तीन बार पैबन्द लगा चुकी हो अब ये जर्जर हो चुकी है पैबन्द लगाकर कितना चला लोगी ।

महिला – चाचा लगा दो इज्जत तो रह जाएगी ।

मास्टर – दस रुपये लूँगा ।

महिला – दस रुपये…..पांच रुपये ले लो चाचा 

मास्टर चाचा मन में बुदबुदा कर झिड़कते हुए  रुक जाना ये मैडम का काम खत्म करता हूँ  फिर तेरा करता हूं ।

महिला खुश होकर सिर हिला कर हाथ जोड़ दी । नीचे जमीन पर  बैठ गई । मेरे हाथ मुझे मिली बधाइयों का रिप्लाई देते थक चुके थे लेकिन वाट्सएप  में बधाई के मैसेज लगातार झआये जा रहे थे। में बधाई लेकर खुश हो गई थी लेकिन पास बैठी महिला की बातों से विचलित हो गई और उस महिला की तरफ देखने लगी ।

एक  लड़की  की आवाज़ ने ध्यान अपनी ओर कर लिया लड़की आई और मास्टर चाचा से कहने लगी 

लड़की – चाचा मेरे जीन्स में जो ये पैबन्द है इसे निकाल दो ।

चाचा – चाचा जीन्स हाथ में लेकर थोड़ तुनक कर पैबन्द की तरफ इशारा कर ठीक तो लगा है ये ।

लड़की – नही चाचा मेरे थाईज पर ये अच्छा नही लग रहा है इस पैबन्द को निकालकर इसमे आप कुछ कट दे दो ।

चाचा – सौ रुपये लूंगा 

लड़की – ठीक है  आप ठीक कर दो  में पंद्रह  मिनट में आती हूँ ।

जमीन पर बैठी महिला  उस लड़की को देखती है और बेचारे से भाव लेकर अपने तन के कपड़ो को देखने लगती है । 

मास्टर मेरे टॉप की तह करते हुए कहता है मेडम ठीक  हो गया  साठ रुपया हो गया ।

मैं- पैसे देते हुए चाचा धन्यवाद ।

चाचा मुझसे पैसे लेते हैं और लंबी सांस  लेकर आसमान की तरफ देख कहते हैं  हे ईश्वर ।।।

एक पैबन्द लगाता है तन ढकने के लिए 

दूसरा पैबन्द हटाता है तन दिखाने के लिए। 

चाचा के द्वारा कहे गए  शब्दो ने झिंझोड़ कर रख दिया मुझे । चाचा को पैसे दे अपने कपड़े लेकर में वहां से चल दी ।मैं कुछ कदम आगे बढ़ गई फिर वापस टेलर चाचा के पास आकर बैठी  उस  महिला से कहा आंटी अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो क्या ये साड़ी आप रख सकती हो।

मेंने माता के लिए ली थी पर मंदिर बंद होने की  इस वजह  से चढ़ा नही पाई।आज मेरा   प्रमोशन हुआ है आप इसे स्वीकार करेगी तो मुझे खुशी होगी ।

महिला के चेहरे पर खुशी के भाव थे वो कुछ ज्यादा न कहकर बस इतना ही बोली कि मेरे भाई की शादी है परसों । 

उसकी आँखों मे नमीं और चमक दोनो दिखाई पड रहे थे ।

मैं उस दिन पैदल रास्ते पैबन्द का मूल्य समझने की कोशिश करती रही ।

चेतना राज

गोरेगांव मुम्बई