स्त्री 

स्त्री का श्रंगार ही उसकी लल्जा है

मान , सम्मान ही उसकी मर्यादा है ।

मान, सम्मान बचाकर रखना ।

यही तो उसका सच्चा गहना है ।

सम्मान बचाकर रखना ही

हर स्त्री का सच्चा धर्म कर्म है ।

पूजा पाठ वृत स्त्री करती है ।

भगवान में श्रद्धा भी रखती है ।

पूजा पाठ करके पति बच्चो की

खुशहाली की प्रार्थना करती है ।

सिर पर पल्लू ढक कर रखना 

ये भी तो स्त्री का श्रंगार है ।

पति के लिये सजना सवरना ।

यही तो स्त्री काअसली श्रंगार है ।

सोने चाँदी के आभूषण भी 

हर स्त्री के पास नही होते है ।

गरीब घर की स्त्री को पेट भर 

खाना भी मुश्किल  से मिलता है ।

सजना सवरना श्रंगार करना

कैसे ही  मुश्किल से होता है ।

लज्जा रूपी आभूषण भी

हर स्त्री का गहना होता है ।

अनन्तराम चौबे अनन्त

 जबलपुर म प्र /3020/