यूट्यूब के जरिये दूध की वैकल्पिक खेती की तकनीक सीखी : अब तक 6 लाख तक का लिया मुनाफा

खरगोन/इन्दौर । सूचना क्रांति के दौर में डिजिटल तकनीक के सहारे संचार माध्यम का सार्थक उपयोग करना भी एक कला ही है। इसी कला की बदौलत खरगोन शहर से करीब 20 किमी. दूर स्थित रायबिड़पुरा के अनिल वर्मा ने 3 वर्षाे में 6 लाख रुपये से अधिक का मुनाफा लिया है। अनिल बताते है कि पहले लॉक डाउन के दौरान महाराष्ट्र के एक किसान से सुरजना के बीज और फलियों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार यूट्यूब पर इस फसल की जानकारी लेते रहें। इसी समय इसकी खेती की ओर रुचि बड़ी। वर्ष 2019 में मनरेगा से जुड़ने के बाद अब तक सुरजने की खेती से वे 5 बार फसल लेकर 6 वी लेने को तैयार है। इससे उन्हें 6 लाख रुपये तक का मुनाफा हुआ है। सुरजने की आधुनिक खेती के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल लेकर बढ़ावा दे रहे हैं।
:: कुपोषण दूर करने में पत्तियों के पॉवडर की महत्वपूर्ण भूमिका ::
46 वर्षीय बीए की शिक्षा पूरी कर कृषि पेशा अपनाने वाले अनिल हमेशा से कुछ नया करने की फिराक में नवीन तकनीक के सहारे नई-नई तकनीक सिख रहे है। उन्होंने बताया कि सुरजने या मोरिंगा की देश सहित विदेशों में अच्छी मांग है। यह एक ऐसा पौधा है जिसकी जड़ से लेकर शाखाओं तक का उपयोग किया जाता है। इसका पोषण में उपयोग के अलावा आयुर्वेद में बड़ा महत्व माना गया है। इसमें दूध की तुलना में चार गुना अधिक पोटेशियम 7 गुना अधिक कैल्शियम संतरा की तुलना में 7 गुना अधिक विटामिन पाया जाता है। अनिल इसकी पत्तियों का पॉवडर बनाकर समुचित मात्रा में गेहूं के आटे में मिलाकर भी व्यवसाय भी कर रहे है। इसलिए हड्डी की बीमारियों में तथा बच्चों को कुपोषण दूर करने में उपयोगी है।
:: नियमित छटिंग और टॉपिंग से मिला भरपूर लाभ ::
वैसे तो सुरजना एक बड़े पेड़ पीपल नीम या बरगद के समान भी आकार ले सकता है। लेकिन अनिल की तकनीक ऐसी है कि वे इससे होने वाले फायदे के लिए मई माह में छटिंग तथा टॉपिंग कर भरपूर फायदा ले रहे है। टॉपिंग करके अधिक से अधिक शाखाओं से 20 से 25 किलो. फलियां ले सकते है जबकि छटिंग से शाखाएं बढ़ाने में सहयोग मिलता है। टॉपिंग पौधे पर आने वाली कलियों को तोड़ते है और छटिंग में निकलने वाली शाखाओं व्यवस्थित करने से अधिक संख्या में शाखाएं निकलती है।
:: 300 से अधिक बीमारियों में कारगर ::
सुरजने का उपयोग न सिर्फ भोजन में बल्कि दवा या आयुर्वेद में इसका उपयोग ज्यादा होता है। इसकी फली व सुखी तथा हरी पत्तियों में कार्बाेहाइड्रेड प्रोटीन कैल्शियम पोटेशियम कैल्शियम आयरन मैंगनीशियम और विटामिनों में ए बी और सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इन सब के अलावा 18 तरह के अमीनों एसिड मिलता है। इस पौधे की फल फूल पत्ती सब्जी छाल पत्ती बीज गोंद का उपयोग होता है। साथ ही जड़ से आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती है। इसकी जड़ तना फल पत्ती छाल और गोंद से करीब 300 से अधिक बिमारियों में कारगर रूप से उपयोगी हो रही है।
:: मनरेगा से मिला सहयोग ::
उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी पीएस बड़ोले ने बताया कि रायबिड़पुरा के अनिल के खेत पर मनरेगा के तहत पौध लगाने के लिए डीपीआर बनाई गई थी। इसमें 1200 पौध के लिए 110704 रुपये की मजदूरी की राशि और 21600 रुपये सामग्री के लिए प्रदाय किये गए है। अनिल ने अपनी रुचि से अपने संसाधनों के सहयोग से करीब 2.50 एकड़ में खेती करने लगे है। इसमें ड्रिप सिस्टम उनका ही है। उनकी खेती करने का उत्साह सराहनीय है। वे सुरजने की फसल के बीच अंतवर्ती खेती भी करते है। अनिल को मनरेगा से आगे 144000 मजदूरी और 163000 सामग्री की कुल राशि 300000 मिलेगी।