मैं तुम्हे मिलूंगी……..

बर्षा की टपकती बूंदों में

मिट्टी की सोंधी महक में

खिलते हुए फूलों मे

गुनगुनाती हुए भौंरो मे

उगती हुई सूरज की धूप में

ढलती हुई शाम मे

मुझे महसूस करना तुम

मैं हर जगह मिलूंगी तुम्हे

तुम्हारे धड़कते हुए हर  धड़कन में….

हर उस वक्त मिलूंगी तुम्हें…

अगर अच्छा सोचते हो तुम

अगर अच्छा करते हो तुम

अगर औरों की खुशी में खुश होते हो तुम

अगर दूसरों के दर्द रुलाते हैं तुम्हें …

बस तुम मुझे महसूस करना

किसी  बेजुबान की आंखों में

किसी बेगुनाह  की याचना में

बिन मांगे बढ़ाए तुम्हारे मदद के हाथो में ……

हां खुशी हूं मैं , सुकून हूं मैं

मैं तुम्हे जरूर मिलूंगी …….

नीना जैन लाइफ कोच दूरदर्शन एंकर