इंदौर दूषित जल कांड: लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, पानी में मिले मल-मूत्र वाले बैक्टीरिया

इंदौर

इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में फैले दूषित जल संकट ने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है। इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इस बीच, एमजीएम मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला से आई पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट ने पूरे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ा दिए हैं। लैब रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुँचने वाले पेयजल में वे खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद थे, जो आमतौर पर इंसानी मल-मूत्र और गटर के पानी में पाए जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग को मिली विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पानी के नमूनों में विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ई-कोली जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये बैक्टीरिया सीधे तौर पर हैजा और गंभीर पेचिश जैसी बीमारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। लैब की इस रिपोर्ट ने उन आशंकाओं पर मुहर लगा दी है कि शहर की पेयजल व्यवस्था में सीवरेज का पानी मिल रहा था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन में लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उल्टी-दस्त का यह जानलेवा प्रकोप फैला।
जांच के दौरान सिस्टम की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों ने पाया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में जिस स्थान पर लीकेज था, ठीक उसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ था। लीकेज के कारण शौचालय और गटर की गंदगी सीधे पीने के पानी की लाइन में समाहित हो रही थी। प्रशासन अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि क्या क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के लीकेज हैं। फिलहाल, पूरे भागीरथपुरा में पेयजल आपूर्ति की पुरानी लाइनों की गहन पड़ताल की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
ग्राउंड जीरो पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए व्यापक सर्वे में 1,714 घरों के 8,571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से सैकड़ों लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए। आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ दिनों में लगभग 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। वर्तमान में 201 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से 32 की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है। यह घटना स्वच्छता के दावों के बीच शहरी बुनियादी ढांचे और जनस्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। प्रशासन अब प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने और दूषित जल के स्रोत को पूरी तरह से बंद करने के प्रयासों में जुटा है, लेकिन 14 मौतों के बाद उपजा यह आक्रोश शांत होता नहीं दिख रहा है।