:: भागीरथपुरा जल त्रासदी को बताया सरकारी हत्या, मृतकों के परिजनों के लिए की 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग ::
:: स्वच्छता पुरस्कारों की विश्वसनीयता पर सवाल ::
इंदौर । मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के मौजूदा हालात पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इंदौर को लगातार आठ बार स्वच्छता का पुरस्कार मिल चुका है, लेकिन आज जिस प्रकार के हालात शहर में बने हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि अधिकारी किस तरह कागजों पर पुरस्कार ला रहे हैं। सिंघार ने तर्क दिया कि यदि इंदौर वास्तव में स्वच्छ होता, तो यहाँ का पानी प्रदूषित नहीं होता और न ही भागीरथपुरा जैसी हृदयविदारक घटना घटती। उन्होंने इंदौर जल-प्रदूषण कांड को भाजपा शासन की घोर लापरवाही, प्रशासनिक देरी और संवेदनहीनता का परिणाम बताया।
इन गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए इंदौर प्रेस क्लब में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जहाँ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शहर की बदहाली का कच्चा चिट्ठा खोला। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विधायक सचिन यादव एवं शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी मंच पर मौजूद रहे। सिंघार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंदौर की जनता वर्तमान में विकास के बजाय भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का दंश झेल रही है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि कांग्रेस पार्टी इन जन समस्याओं के समाधान के लिए सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करेगी।
इंदौर के भगीरथपुरा (वार्ड क्रमांक-11) में पेयजल पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट पर सिंघार ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस त्रासदी में अब तक 16 से अधिक नागरिकों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से बीमार हैं और हजारों प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे महज एक दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए प्रशासनिक विफलता बताया। सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये की सहायता राशि को उन्होंने अपमानजनक बताते हुए मांग की कि मृतक के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि पीड़ित परिवार गरीब और मजदूर वर्ग के हैं जिनका रोजगार पूरी तरह ठप हो चुका है।
नगर निगम के कामकाज पर प्रहार करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि इंदौर में भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल चालू हो गया है। उन्होंने कहा कि सड़कें खोदो और नए टेंडर लाओ की नीति के तहत जनता की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है। अच्छे-भले पेवर ब्लॉक्स को निकालकर नए पेवर्स लगाना भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने 2012 के सवा सौ करोड़ के ड्रेनेज घोटाले की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी कागजों पर महज 24 घंटे के भीतर पांच किलोमीटर पाइपलाइन डालने जैसे फर्जी दावे किए गए थे। आज भी इंदौर की जनता से भारी टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन वह पैसा विकास के बजाय फर्जी बिलिंग और घोटालों की भेंट चढ़ रहा है।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए सिंघार ने कहा कि आज इंदौर का नागरिक सड़कों पर बंधक बन चुका है। नौकरीपेशा लोग हों या स्कूल जाने वाले बच्चे, कोई भी समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच पा रहा है। उन्होंने कहा कि माँ अहिल्या की नगरी ने भाजपा को नगर निगम, विधानसभा और संसद तक हर स्तर पर प्रचंड जनादेश दिया, लेकिन बदले में भाजपा ने इंदौर को केवल उपेक्षा, धोखा और अव्यवस्था दी है। उन्होंने मंत्रियों द्वारा पीड़ितों के प्रति आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई। अंत में उन्होंने रहवासी संघों का आह्वान करते हुए कहा कि आपकी सड़कें और आपका मोहल्ला आपका अधिकार है, इसलिए इस भ्रष्टाचार के खिलाफ चुप्पी तोड़कर एकजुट होना आवश्यक है।

