टीबी जांच में देश के टॉप-15 शहरों में शामिल हुआ इंदौर

इंदौर

:: मनोरमा राजे अस्पताल की आईआरएल लैब को राष्ट्रीय प्रमाणन; अब चेन्नई पर नहीं रहना होगा निर्भर ::
इंदौर। स्वच्छ भारत अभियान में लगातार सात बार कीर्तिमान स्थापित करने के बाद अब इंदौर ने स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शहर के मनोरमा राजे टीबी अस्पताल स्थित राज्य स्तरीय इंटरमीडिएट रेफरेंस लेबोरेटरी (आईआरएल) को टीबी की नई दवाओं की जाँच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही इंदौर अब देश के उन चुनिंदा 15 शहरों में शामिल हो गया है, जहाँ टीबी की अत्याधुनिक दवाओं – बेडाक्विलिन (बीडीक्यू) और प्रेटोमैनिड (पीटीएम) की प्रभावशीलता का परीक्षण (एलसी-डीएसटी) संभव हो सकेगा।
:: चेन्नई भेजने की मज़बूरी खत्म, समय की होगी बचत ::
उल्लेखनीय है कि यह जटिल परीक्षण केवल बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशालाओं में ही किया जा सकता है। अब तक पूरे मध्य प्रदेश के मरीजों के सैंपल चेन्नई स्थित एनआईआरटी भेजे जाते थे, जहाँ से रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता था। अब इंदौर की इस लैब को सुप्रा नेशनल रेफरेंस लेबोरेटरी और केंद्रीय क्षय प्रभाग द्वारा हरी झंडी मिलने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
:: उप मुख्यमंत्री ने दी बधाई ::
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की वैज्ञानिक दक्षता का प्रमाण है और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य में मील का पत्थर साबित होगा।
अस्पताल प्रभारी डॉ. शैलेन्द्र जैन के अनुसार, इस मान्यता के बाद अब इंदौर में ही माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस पर दवाओं के असर को जाँचा जा सकेगा। इससे दवा-प्रतिरोधी (एमडीआर) मरीजों को समय पर सही उपचार मिलेगा और संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिलेगी। यह लैब सरकार की नई बी-पाल उपचार योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी। इंदौर की यह उपलब्धि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए भी वरदान बनेगी।
:: इंदौर की इस उपलब्धि से क्या बदलेगा?

  • अब तक टीबी मरीजों के सैंपल चेन्नई भेजे जाते थे, जहाँ रिपोर्ट आने में 15 से 20 दिन लगते थे। अब इंदौर में ही जाँच होने से 24 से 48 घंटों में सटीक रिपोर्ट मिलेगी और तत्काल इलाज शुरू हो सकेगा।
  • इंदौर की आईआरएल लैब अब देश की उन चुनिंदा 15 प्रयोगशालाओं में शामिल हो गई है, जो बेडाक्विलिन जैसी दुनिया की सबसे आधुनिक टीबी दवाओं का परीक्षण करने हेतु अधिकृत हैं।
  • हज़ारों रुपए की लागत वाली यह जटिल वैज्ञानिक जाँच शासकीय स्तर पर आम जनता के लिए पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध होगी।
  • दवा-प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर) की समय पर पहचान होने से संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिलेगी, जिससे टीबी मुक्त इंदौर का सपना साकार होगा।