सोमनाथ में पुनः स्थापित हो रहा है प्राचीन वैभव, स्वर्णिम आभा से दमक रहा आस्था का केन्द्र

धार्मिक

पीएम मोदी के नेतृत्व में श्री सोमनाथ मंदिर पर 1500 से अधिक स्वर्ण कलश, पौराणिक गौरव के अनुरूप हो रहा भव्य पुनर्निर्माण
गिर सोमनाथ | पौराणिक तथा ऐतिहासिक ग्रंथों में वर्णित भारत वर्ष के आस्था केन्द्र सोमनाथ का वैभव प्रधानमंत्री तथा सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पुनः स्थापित हो रहा है। अविनाशी भारतीय संस्कृति के अप्रतिम प्रतीक श्री सोमनाथ मंदिर पर आज 1500 से अधिक स्वर्ण कलश सुशोभित हो रहे हैं। श्री सोमनाथ मंदिर का गर्भगृह, शिवलिंग पर छत्र, गर्भगृह के द्वार तथा द्वार के पास के स्तंभ, मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वजदंड और उससे जुड़ा त्रिशूल आदि सोमनाथ के पुनर्जीवित हुए वैभव की साक्षी दे रहे हैं।
इस संदर्भ में सोमनाथ के इतिहासप्रेमी तथा अध्ययनी भास्कर वैद्य कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इतिहास पुराणों में वर्णित सोमनाथ का वैभव पुनः स्थापित हो रहा है। ऐतिहासिक एवं पौराणिक ग्रंथों में सोमनाथ की वैभवता तथा समृद्धि का जो वर्णन देखने को मिलता है, उसके अनुरूप एवं पौराणिक महत्व को बनाए रखते हुए ऐश्वर्य पुनः स्थापित किया जा रहा है। महत्वपूर्ण है कि ग्रंथों में उल्लेख के अनुसार सदियों पूर्व भारी वजनदार सोने की श्रृंखला तथा घंट, रत्न जड़ित स्तंभ आदि वैभव से सोमनाथ मंदिर जगमगाता था। श्री सोमनाथ मंदिर के वैभव का लेखक कनैयालाल मुनशी ने अपनी पुस्तकों में भी उल्लेख किया है। सोमनाथ मंदिर का यह वैभव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से भी विश्वभर में विख्यात था।
इस संदर्भ में श्री वैद्य कहते हैं कि भगवान सोमनाथ के लिए विशेष रूप से कश्मीर से केसर के फूल और हरिद्वार से गंगाजल लाया जाता था। श्री सोमनाथ मंदिर अपनी अपार वैभवता तथा भव्यता से समृद्ध था। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर को स्वर्णमय बनाने का प्रारंभ तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हुआ था। मोदी सोमनाथ मंदिर के स्वर्ण जड़ित होने के प्रसंगों में उपस्थित रहे थे। वैद्य कहते हैं कि अनन्य शिवभक्तों तथा श्रेष्ठियों के दान से सोमनाथ को स्वर्णमय बनाया जा रहा है। वर्ष 2002 में राजकोट के एक परिवार ने सोमनाथ मंदिर में पहले 75 किलो का थाल अर्पण किया। इसके बाद लखी परिवार ने भी सोने का दान देने का संकल्प किया।
कहा जा सकता है कि इसके साथ ही श्री सोमनाथ मंदिर को कुछ हद तक स्वर्णमय करने की शुरुआत हुई। आज भी सोमनाथ ट्रस्ट की स्वर्ण कलश योजना के माध्यम से कई दाताओं ने मंदिर पर स्थित कलशों को स्वर्ण जड़ित कराया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अस्मिता के प्रतीक सोमनाथ तीर्थक्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से समुद्र तट पर भव्य वॉक-वे, श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुलभ व्यवस्थाएँ, गोल्फ कार आदि सुविधाएँ विकसित की गई हैं।