-आंकड़ों के मुताबिक 35 जिलों में से 10 जिलों में मतदाताओं की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी
नई दिल्ली । असम विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने राज्य में 2,43,485 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची के मुकाबले फाइनल रोल में 0.97 फीसदी नाम कम हो गए हैं। असम की फाइनल मतदाता सूची के आने के बाद राज्य के मुस्लिम बहुल इलाके में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है तो अनुसूचित जनजाति वाले क्षेत्रों में संख्या घट गई है। ऐसे में जनसांख्यिकीय यानी डेमोग्राफी को लेकर सियासी मुद्दा गर्मा सकता है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असम निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर फाइनल मतदाता सूची मंगलवार को अपलोड कर दी गई थी। इस सूची में कुल 2 करोड़, 49 लाख, 58 हजार 139 मतदाता हैं, जिसमें 1 करोड़ 24 लाख 82 हजार 213 पुरुष और 1 करोड़ 24 लाख 75 हजार 583 महिलाएं और 343 थर्ड जेंडर हैं। फाइनल वोटर लिस्ट के जिलेवार आंकड़ों के लिहाज से असम के कुल 35 जिलों में से 24 जिले में वोटर्स कम हुए हैं जबकि 10 जिलों में वोटर बढ़े हैं। यह बढ़ोत्तरी 100 वोटों से लेकर 30 हजार से ज्यादा है। ऐसे में देखा गया है कि आदिवासी इलाके में वोटर घटे हैं और मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाता बढ़े हैं। हालांकि, अभी ये मालूम नहीं पड़ रहा है कि जो मतदाता के नाम कटे और बढ़े हैं, वो किस धर्म से हैं।
असम के जिलावार आंकड़ों के मुताबिक 35 जिलों में से केवल 10 जिलों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इनमें बारपेटा, धुबरी, गोलपाड़ा, मोरीगांव, नगांव, दक्षिण सलमारा, बोंगाईगांव और हैलाकांडी जैसे 8 मुस्लिम बहुल जिले शामिल हैं। इसके अलावा दो गैर-मुस्लिम जिले माजूली और बजाली हैं, जहां पर मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। माजुली में करीब 209 और बजाली में करीब 1,300 मतदाताओं की बढ़त हुई है। पश्चिमी या निचले असम के मुस्लिम-बहुल जिलों, जैसे धुबरी, दक्षिण सालमारा, गोलपारा और बारपेटा में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इसमें दक्षिण सालमारा में करीब 200 से लेकर बारपेटा में 25,000 से ज्यादा की वृद्धि हुई।
असमिया गढ़ माने जाने वाले ऊपरी असम के जिलों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट का रुझान स्पष्ट दिखा। सोनितपुर में 22,186, लखीमपुर में 20,998, गोलाघाट में 20,027 और जोरहाट में 11,940 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई फीसदी के लिहाज से दरांग (–2.68%) और उदालगुड़ी (–2.76%) में भी राज्य के सबसे अधिक गिरावट वाले आंकड़े सामने आए। डिब्रूगढ़, शिवसागर और तिनसुकिया में 1 फीसदी से कम की मामूली कमी दर्ज की गई।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के जलुकबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से 4,300 से ज्यादा के नाम हटा दिए गए हैं। जलुकबाड़ी में 2,06,314 मतदाताओं के नाम पाए गए, जो पिछले साल 27 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा सूची में 2,10,624 नामों की तुलना में 4,310 कम हैं। पूर्वी या ऊपरी असम और ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तटों से सटे 11 जिलों में से 10 जिलों में पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या कम हुई। सरमा ने कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के कारण राज्य मतदाता सूची के हालिया विशेष पुनरीक्षण के दौरान संदिग्ध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगस्त 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद पहली बार इतनी बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। यह समझौता राज्य से अवैध प्रवासियों या बांग्लादेशियों को बाहर निकालने के लिए छह साल तक चले आंदोलन के अंत का प्रतीक था। सरमा ने जोर देकर कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने पहले कहा था कि एसआईआर के दौरान केवल मिया लोगों को नोटिस दिए गए ताकि उन्हें दबाव में रखा जा सके।

