हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों के व्यवहार में आ रहा बदलाव : सर्वे

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नई दिल्ली । ताजा सर्वेक्षणों में वैज्ञानिकों और वन विभाग की टीमों ने हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले कुछ बेहद खास जीवों के व्यवहार और आवास को लेकर नई जानकारियाँ जुटाई हैं, जो संरक्षण प्रयासों के लिए अहम साबित हो सकती हैं। स्नो लेपर्ड, जिसे पहाड़ों का भूत कहा जाता है, इन रहस्यमयी जीवों में सबसे अधिक प्रसिद्ध है। अपनी मोटी फर, लंबे शरीर और बड़े पंजों की मदद से यह बर्फीली ढलानों पर आसानी से घूम सकता है। लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ऊँचाइयों में रहने वाला यह बड़ा शिकारी अपने एकांतप्रिय स्वभाव के कारण बहुत कम दिखाई देता है। सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि स्नो लेपर्ड का क्षेत्र तेजी से बदलती जलवायु के कारण प्रभावित हो रहा है, जिससे इनके संरक्षण की चुनौती और बढ़ जाती है। इसी तरह हिमालय के जंगलों में मिलने वाला हिमालयन मोनाल भी इन दिनों वैज्ञानिक अध्ययन का केंद्र बना हुआ है। उत्तराखंड का राज्य पक्षी माना जाने वाला यह रंग-बिरंगा पक्षी अपने चमकीले और आकर्षक पंखों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। 2,400 से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर मिलने वाला मोनाल ओक, देवदार और रोडोडेंड्रॉन के जंगलों में रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मानव गतिविधियों और आवासों में कमी के कारण मोनाल की संख्या पर निगरानी जरूरी हो गई है। पूर्वी हिमालय के घने जंगलों में पाया जाने वाला रेड पांडा भी इस सूची का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के ठंडे, बांस से भरे जंगलों में रहने वाला यह छोटा और शर्मीला जीव अक्सर रात में सक्रिय होता है। इसकी लाल-भूरी फर और घनी पूँछ इसे अलग पहचान देती है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आवास घटने और अवैध शिकार के कारण रेड पांडा की संख्या चिंता का विषय बन चुकी है। हिमालयन ताहर और मस्क डियर भी क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ताहर खड़ी चट्टानों पर चढ़ने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है और अक्सर झुंडों में दिखाई देता है। मस्क डियर, जिसकी नर प्रजाति में पाई जाने वाली मस्क ग्रंथि लंबे समय से इत्र उद्योग में उपयोग की जाती रही है, चोरी-छिपे होने वाले शिकार के कारण लगातार खतरे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी दुर्लभ जीवों का संरक्षण केवल पर्यावरण संतुलन ही नहीं, बल्कि हिमालय की जैवविविधता को सुरक्षित रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।
लगातार बदलते मौसम, ग्लोबल वार्मिंग और इंसानी दखल से इनका अस्तित्व खतरे में है। ऐसे में वैज्ञानिकों और प्रशासन का संयुक्त प्रयास ही इन अद्भुत जीवों को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचा सकता है। बता दें कि हिमालय का विशाल पर्वतीय इलाका सिर्फ अपनी बर्फीली चोटियों और शांत घाटियों के लिए ही नहीं, बल्कि वहां बसे दुर्लभ और अद्भुत वन्यजीवों के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है। यहाँ ऐसे जीव रहते हैं, जिन्हें देख पाना किसी सौभाग्य से कम नहीं माना जाता। कठोर मौसम, ऊँचाई और दुर्गम रास्तों के कारण ये जीव आमतौर पर नजर नहीं आते, लेकिन इनकी मौजूदगी हिमालयी पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।