इंदौर की सड़कों पर उमड़ा मजदूरों और किसानों का सैलाब : केंद्र व राज्य की नीतियों के खिलाफ फूंका बिगुल

इंदौर

गांधी हॉल पर विशाल सभा के बाद निकाला जुलूस; राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम वेतन और एमएसपी की उठाई मांग ::
इंदौर । केंद्र और राज्य सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के विरोध में गुरुवार को इंदौर में मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और कर्मचारियों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान पर सैकड़ों की तादाद में आशा कार्यकर्ता, बैंक-बीमा कर्मी, ठेका मजदूर और ग्रामीण जत्थों के रूप में सुबह 10 बजे से ही गांधी हॉल पर एकत्र होना शुरू हो गए थे। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी करते हुए अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की।
:: श्रम संहिताओं और एमएसपी को लेकर आक्रोश ::
सीटू के सी.एल. सरावत की अध्यक्षता में आयोजित आम सभा में वक्ताओं ने चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को रद्द करने और किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग पर जोर दिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बजट के जरिए खेती-किसानी को बर्बाद कर जमीनें कॉर्पोरेट घरानों को सौंपी जा रही हैं। साथ ही, आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर शहरों में मजदूरी के लिए मजबूर करने वाली नीतियों पर कड़ा रोष प्रकट किया गया।
:: न्यूनतम वेतन 26,000 रू. करने की मांग ::
आंदोलन के दौरान आशा-उषा कार्यकर्ताओं, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और ठेका मजदूरों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठी। प्रदर्शनकारियों ने सभी श्रेणियों के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये निर्धारित करने की मांग की। सभा को लायर यूनियन के बी.एल. नागर, किसान सभा के अरुण चौहान, कविता सोलंकी, कैलाश लिबोदिया, अजीत केतकर और रामस्वरूप मंत्री सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।
:: लेबर कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन ::
गांधी हॉल में सभा के पश्चात एक विशाल जुलूस निकाला गया, जो शहर के प्रमुख मार्गों और पालिका प्लाजा से होता हुआ लेबर कमिश्नर कार्यालय पहुंचा। यहाँ प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर पालीवाल को महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। डिप्टी कमिश्नर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मांग पत्र तत्काल राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाएगा और स्थानीय स्तर की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर निराकरण किया जाएगा। इस आंदोलन में विशेष रूप से महिला मजदूरों और कर्मचारियों की बड़ी भागीदारी देखी गई।