प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा: ओवैसी और कांग्रेस ने नीतिगत बदलाव को बताया विश्वासघात

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हैदराबाद । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान इजरायल यात्रा को लेकर देश के भीतर राजनीतिक पारा गरमा गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी सहित मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस दौरे पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे भारत की पारंपरिक विदेश नीति के साथ विश्वासघात करार दिया है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी एक विस्तृत पोस्ट में केंद्र सरकार के इस कदम की कठोर आलोचना की है। ओवैसी ने इजरायली नेतृत्व की ओर इशारा करते हुए उन्हें युद्ध अपराधी बताया, जिनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरफ्तारी वारंट की चर्चा है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे समय में इजरायल जाकर वहां के नेतृत्व के साथ गर्मजोशी दिखाना भारत द्वारा दशकों से फिलिस्तीनी अधिकारों के प्रति दिए जा रहे सैद्धांतिक और ऐतिहासिक समर्थन के विरुद्ध है। ओवैसी ने मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों पर गंभीर आशंका जताते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री की यात्रा समाप्त होते ही अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन जायोनिज्म मुर्दाबाद के नारे के साथ करते हुए इजरायल की राजनीतिक विचारधारा के प्रति अपना कड़ा विरोध स्पष्ट किया।
सिर्फ ओवैसी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी इस दौरे को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा को नैतिकता के विरोध में बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत के ऐतिहासिक रुख की याद दिलाते हुए कहा कि 20 मई 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गाजा में संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की भारतीय टुकड़ी से मुलाकात की थी। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने हमेशा फिलिस्तीन के साथ एकजुटता दिखाई है, चाहे वह 1981 में स्मारक डाक टिकट जारी करना हो या 1988 में औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राष्ट्र को मान्यता देना। इसी क्रम में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते समय गाजा में मारे गए हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत का इतिहास हमेशा सत्य, शांति और न्याय के साथ खड़े होने का रहा है और हमें दुनिया को यही रोशनी दिखानी चाहिए।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री अपनी इस दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के दौरान इजरायल के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा द्वारा किए गए भव्य स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने गाजा शांति पहल को पूरे क्षेत्र के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग बताया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर इजरायल के साथ अटूट एकजुटता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर अडिग है। उन्होंने वैश्विक मंच से आह्वान किया कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो, वह वैश्विक शांति के लिए खतरा है और इसका मुकाबला करने के लिए दोहरे मापदंड छोड़कर समन्वित वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है। जहां सरकार इस दौरे को कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष इसे भारत की गुटनिरपेक्ष और फिलिस्तीन समर्थक छवि को नुकसान पहुँचाने वाला कदम मान रहा है।