होली साल में एक बार आती है, लेकिन कई शहरों में इसका असर पूरे साल महसूस होता है। होली का असली मतलब रंग, खुशी और साथ मिलकर जश्न मनाना है, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है जो अब आम होता जा रहा है। कई लोग अपनी अस्वच्छ आदतों से शहर की जगहों को सालभर खराब करते रहते हैं। बेबस जानवरों पर रंग डालकर होली खेलना बेहद क्रूर है और इससे जरूर बचना चाहिए। ज़ी टीवी ने एक नई फिल्म ‘पिच पिचक पिच’ पेश की है। इस फिल्म की कहानी एक मोहल्ले के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां बच्चे पूरे उत्साह और सच्चे त्यौहार की भावना के साथ होली खेलना चाहते हैं। धीरे-धीरे पूरा मोहल्ला समझने लगता है कि उनकी कुछ गलत आदतें ही इस जश्न की असली खुशी को कम कर रही हैं। इसके बाद लोग तय करते हैं कि वे सार्वजनिक जगहों को गंदा करने और दूसरों या जानवरों को परेशान करने वाली आदतें छोड़ देंगे और जिम्मेदारी के साथ होली मनाएंगे।

